
मुकेश हिंगड़
उदयपुर. गांवों में आज भी डाकघरों से आम लोगों के काम होते है। गांव में रहने वाले परिवारों की पेंशन हो या बचत जमा हो उनके लिए डाकघर ही सबसे मददगार सेवा केन्द्र है। शहरों में डाकघरों का रूप आधुनिक किया है तो कुछ ब्रांचों को बैंक बना दिया गया है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में तो आज भी कई डाकघर ऐसे है जिनका अपना भवन तक उनको नसीब नहीं है और वे किराए के भवन में चल रहे है। पूरे प्रदेश में तो 8 ऐसे जिले भी है जहां पर एक भी डाकघर का अपना स्वयं का भवन नहीं है। उदयपुर संभाग की ही बात करें तो यहां 20 डाकघरों का स्वयं का भवन है तो बाकी 84 किराए के भवन में चल रहे है।
इन जिलों में ग्रामीण डाकघरों का अपना भवन नहीं
हनुमानगढ़
श्रीगंगानगर
जालौर
कोटा
बारां
झालावाड़
टोंक
चुरू
उदयपुर जिले में ये डाकघर स्वयं के भवन में
मावली एसओ, खेरवाड़ा, कोटड़ा, वल्लभनगर व सराड़ा
उदयपुर जिले में ये डाकघर किराए के भवन में
जावरमाइंस, डबोक, ऋषभदेव, बम्बोरा, गोगुंदा, झाड़ोल, खेरोदा, जिंक स्मेल्टर, चावंड, छाणी, ढेलाना, इंटाली खेड़ा, झाड़ोल, झल्लारा, खेमली, कुराबड़, नाई, नांदेशमा, ओगणा, पलाना खुर्द, परसाद, फलासिया, सायरा व सेमारी डाकघर।
उदयपुर संभाग के ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति
जिला... विभाग के भवन में... किराए के भवन में
उदयपुर ... 05... 24
प्रतापगढ़... 04... 01
चित्तौडगढ़़... 05... 14
बांसवाड़ा... 02... 12
डूंगरपुर... 02... 20
राजसमंद... 02... 13
कुल... 20... 84
(ये आंकड़े सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र के डाकघरों के)