
धूलकोट चौराहे पर इस्कॉन की रथयात्रा की आरती उतारते भक्त।
उदयपुर. जैसे समुद्र में लहरें उठती हैं, वैसे ही गुरुवार को शहर श्रद्धा और आस्था की हिलोरों में डूबा नजर आया। भगवान जगन्नाथ स्वामी, माता लक्ष्मी और दाणीरायजी के साथ की रथयात्रा में उमड़े श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। करीब सात किमी लंबे यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि कहीं भी पैर रखने तक की जगह नहीं रही। इसके बावजूद प्रभु के दर्शन की लालसा लिए भक्त पूरे मार्ग पर डटे रहे।
रथयात्रा मार्ग पर सैकड़ों स्वागत द्वार बनाए गए, जहां विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से प्रभावना वितरित की। जगदीश चौक पर दोपहर दो बजे से ही श्रद्धालुओं की भीड़जुटनी शुरू हो गई। रथयात्रा और शामिल झांकियों को देखने के लिए लोगों ने जहां जगह मिली, वहीं अपना स्थान बना लिया। समय के साथ भीड़ बढ़ती गई।
दोपहर 3.42 बजे लक्ष्मीजी की प्रतिमा को मंदिर से बाहर लाया गया। इसके बाद 3.57 बजे शाही लवाजमे के साथ ठाकुरजी जगन्नाथ राय के विग्रह स्वरूप को जैसे ही मंदिर से बाहर लाया गया, जगदीश चौक जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने हाथ उठाकर गगनभेदी उद्घोष किए। पुजारियों ने ठाकुरजी को झुलाते हुए मंदिर की सीढ़ियों से नीचे उतारा और रथ में विराजित किया। पर्दा लगाकर श्रृंगार के बाद जैसे ही दर्शन कराए गए, श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया। आरती के बाद पहले पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वराज सिंह मेवाड़ और डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने रथ में विराजित ठाकुरजी की पूजा-अर्चना कर भेंट अर्पित की। इसके बाद परंपरा के अनुसार मार्ग बुहारने और रथ की रस्सी खींचने के साथ रथयात्रा का शुभारंभ हुआ। इस दौरान मेवाड़ प्रताप दल की ओर से भगवान को 21 बंदूकों की सलामी दी गई। रथयात्रा में सबसे आगे विभिन्न झांकियां, उनके पीछे कलश धारण किए महिलाएं, हाथी, शाही लवाजमा, गणेशजी की झांकी, पारंपरिक रथ और अंत में रजत रथ में विराजित ठाकुरजी नगर भ्रमण पर निकले।
दर्शन के लिए उठाया हर कष्ट
रथयात्रा से पहले दोपहर करीब दो बजे से ही झांकियों को आगे बढ़ाना शुरू किया गया। इस दौरान जगदीश चौक पर मौजूद भीड़ अपनी जगह से हटने को तैयार नहीं थी। एक-दूसरे से सटकर खड़े श्रद्धालुओं के बीच से झांकियों को निकालने में पुलिसकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
एक झलक के लिए आतुर रहे श्रद्धालु
शाम को जैसे ही ठाकुरजी नगर भ्रमण पर निकले, श्रद्धालु उनकी एक झलक पाने के लिए आतुर दिखाई दिए। हाथी-घोड़ा-पालकी, जय कन्हैयालाल की..., जगन्नाथ स्वामी की जय... और कृष्ण कन्हैयालाल की जय... जैसे जयकारों से पूरा मार्ग गूंजता रहा।
एक ड्रोन तारों फंसा, एक टूटा
रथयात्रा के हर पल को कैद करने की होड़ रही। यात्रा में ड्रोन उड़ते रहे। जगदीश चौक में एक ड्रोन तारों में उलझ गया। घंटाघर पर एक ड्रोन गिरकर टूट गया।
शाम होते ही मेले में बदला शहर
पूरे मार्ग पर जगह-जगह स्वागत द्वार और सेवा काउंटर लगाए। दोपहर से ही भजनों की स्वर लहरियां गूंजने लगी। शाम होते-होते पूरा मार्ग श्रद्धालुओं से भर गया। विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं को आइसक्रीम, खिचड़ी, खीर, बूंदी, आलूबड़े, पकौड़े सहित अन्य प्रसाद वितरित किए।
इनकी रही मौजूदगी
रथयात्रा में शहर विधायक ताराचंद जैन, भाजपा जिलाध्यक्ष गजपालसिंह राठोड़, कांग्रेस देहात जिलाध्यक्ष रघववीर सिंह मीणा, शहर जिलाध्यक्ष फतहसिंह सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रबुद्धजनों ने भाग लिया।
यह भी खास
1100 महिलाएं कलश धारण कर रथयात्रा में शामिल हुईं।
30 वर्षों से शहर में निकल रही है रथयात्रा।
रथयात्रा में 26 झांकियां शामिल हुईं।
50 हजार से अधिक श्रद्धालु जुटे।
रथयात्रा करीब 10 घंटे तक चली।
रथयात्रा की झलकियां
- दोपहर 3.57 बजे मंदिर से बाहर आए ठाकुरजी।
- शाम 4.45 बजे जगदीश चौक से रवाना हुई रथयात्रा।
- मेवाड़ प्रताप दल ने 21 बंदूकों की सलामी दी।
- मार्ग में विभिन्न मंदिरों और समाजों की ओर से आरती उतारी।
- श्रद्धालुओं ने घरों से पुष्पवर्षा कर ठाकुरजी और झांकियों का स्वागत किया।
- कई लोग घर से लड्डू गोपाल भी साथ लाए और कुछ बच्चों को कृष्ण रूप धराकर साथ लाए
51 स्वागत द्वार, 100 से अधिक स्थानों पर आरती
इस्कॉन रथयात्रा महामहोत्सव में गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। भगवान जगन्नाथ को भव्य एवं आकर्षक ढंग से सुसज्जित रथ में विराजमान कर सुबह ठीक 8 बजे रथयात्रा निकाली गई। घोड़ा गाड़ी, बग्गी, ऊंट गाड़ी, गाजे-बाजे, शाही लवाजमे और सिर पर कलश धारण किए माताओं के साथ जैसे ही रथयात्रा रवाना हुई, पूरा मंदिर परिसर जय जगन्नाथ और हरे कृष्ण, हरे राम के जयघोष से गूंज उठा। जैसे-जैसे रथयात्रा आगे बढ़ती रही भक्तों की भीड़ इसमें जुड़ती गई। अध्यक्ष मायापुरवासी ने बताया कि मार्ग में जगह-जगह भगवान जगन्नाथ का स्वागत, आरती और पुष्पाभिषेक किया। यात्रा मार्ग पर 51 स्वागत द्वार सजाए गए, जबकि 100 से अधिक स्थानों पर आरती उतारी गई। इसके अलावा अनेक काउंटर और स्टॉलों पर विभिन्न प्रकार के खाद्य एवं पेय प्रसाद का वितरण किया।
आधा किमी तक फैला रथोत्सव
रथयात्रा का अगला सिरा यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर था, जबकि भगवान का रथ पीछे नागदा रेस्टोरेंट के पास था। आधे किमी से लंबे रथोत्सव का नेतृत्व न्यूजीलैंड के पंचरत्न प्रभु तथा सत्यनारायण चौधरी ने किया। उवृंदावन के देवहरि प्रभु एवं स्थानीय वैष्णव ब्रह्मचारी भजन-कीर्तन और नृत्य करते रहे।
महिलाओं ने खींचा रथ
डॉ. बालकृष्ण शर्मा ने बताया कि रथयात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने रथ की रस्सी खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया। बोहरा गणेशजी चौराहे पर भगवान जगन्नाथ और बोहरा गणेशजी का मिलन हुआ।
5100 दीयाें से हुई बेड़ी हनुमान–भगवान जगन्नाथ महाआरती
रथयात्रा के दौरान श्री महावीर हनुमान मंदिर धूलकोट (बेड़ी हनुमान) और भगवान जगन्नाथ की 5100 दीपक से महाआरती हुई। कार्यक्रम संयोजक डॉ. प्रदीप कुमावत ने बताया कि सुबह से ही श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए रथ की प्रतीक्षा में जुटे रहे। आलोक इंटरेक्ट क्लब के विद्यार्थियों ने भक्तिमय नृत्य और गीत प्रस्तुत किए। रथयात्रा के पहुंचने के बाद महाआरती की। मंदिर के पुजारी सुरेश वैष्णव, ट्रस्ट अध्यक्ष हरीश वर्मा, सचिव सीपी बंसल मौजूद रहे। इस दौरान सांकेतिक रूप से भगवान हनुमान को बेड़ी पहनाई तथा रथ आगमन पर एक बेड़ी भगवान जगन्नाथ को समर्पित की।
Updated on:
17 Jul 2026 05:52 pm
Published on:
17 Jul 2026 05:52 pm
