
Heritage Volunteer : उदयपुर में एनसीसी, एनएसएस और स्काउट की तर्ज पर अब कॉलेजों में भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटेक) की ओर से हेरिटेज वॉलियंटर तैयार किए जाएंगे, जो देश में खत्म होती सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए कार्य करेंगे। इसी मुहिम के तहत इंटेक ने ’केप्चर कल्चर’ कार्यक्रम प्रारंभ किया है। इसके तहत कॉलेज स्टूडेंट्स अपनी रुचि के अनुसार अमूर्त विरासत संरक्षण के लिए कार्य कर सकेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी विरासत के संरक्षण के लिए नई पीढ़ी को तैयार करना है। ’केप्चर कल्चर’ कार्यक्रम इसी मुहिम की शुरुआत है। जिसमें कॉलेज विद्यार्थियों के लिए एक गतिविधि का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत किसी भी संकाय में स्नातक कर रहे विद्यार्थी इस मुहिम से जुड़ सकते हैं। उन्हें अपनी रुचि के अनुसार किसी भी एक अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का अध्ययन करना होगा।
इसके तहत उन्हें फील्ड में जाकर उस विधा की बारीकियों को समझना होगा। उससे संबंधित एक प्रश्रावली तैयार कर उनके उत्तर जानने होंगे। उसके अच्छे फोटोग्राफ्स केप्चर करने होंगे और बाद में एक हजार शब्दों का लेख उस विरासत पर लिखकर 31 मार्च तक इंटेक के स्थानीय चेप्टर प्रतिनिधियों को सौंपना होगा। इस कार्य को इंटेक मुख्यालय भेजा जाएगा, जहां से विद्यार्थियों को इंटर्नशिप सर्टिफिकेट जारी होंगे।
इंटेक की ओर युवाओं को विरासत से जोडऩे के लिए अभी कई स्कूलों यंग हेरिटेज क्लब चलाए जा रहे हैं। जिन्हें हेरिटेज संरक्षण के लिए प्रेरित करने के लिए समय-समय पर गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।
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अगोचर सांस्कृतिक धरोहर या अमूर्त सांस्कृतिक विरासत उन क्रियाकलापों, अभिव्यक्तियों या कौशलों को कहते है, जिसे यूनेस्को किसी स्थान की सांस्कृतिक धरोहर मान्य करता है। विभिन्न लोक कलाएं, पाक कला, भाषा, परम्परा, प्रथाएं आदि इसमें शामिल है।
● लोक संगीत
● खाना पकाने की विधाएं
● मांडने
● सांझी
● पिछवई
● पोर्टरी डेकोरेशन
● टाइ एण्ड डाई
● अन्य कोई स्थानीय विरासत
इंटेक उदयपुर स्कंध कन्वीनर प्रो. ललित पांडेय का कहना है कि लुप्त होती विरासत को बचाने के लिए युवाओं को इससे जोडऩा जरूरी है। इसी मुहिम के तहत इंटेक ने कॉलेजों में ’केप्चर कल्चर’ कार्यक्रम शुरू किया है। आगे चलकर हेरिटेज वॉलियंटर तैयार किए जाएंगे। स्कूलों में यंग हेरिटेज क्लब चलाए जा रहे हैं।
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