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उदयपुर. तपागच्छ की संस्थापन भूमि आयड़ तीर्थ पर आचार्य यशोभद्र सूरिश्वर की निश्रा में ओली तपस्या करने वाले तपस्वियों का बहुमान हुआ। महासभा के मंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि ओली महोत्सव में तपस्या करने वाले 75 तपस्वियों का आचार्य के सान्निध्य में महासभा के पदाकारियों ने बहुमान किया। सामूहिक पारणे कराए। आचार्य ने नवपद ओली में तप पद एवं श्रीपाल मैना सुंदरी की कथा का विवेचन किया। आचार्य का 63वां जन्म दिवस धर्म-ध्यान व तप-त्याग के साथ मनाया गया। महिला मंडलों ने मंगल गीत से आचार्य श्री को जन्म दिन की बधाइयां दी।
आत्मा पर जीत अनंत सुखों का पर्याय
महाप्रज्ञ विहार में आचार्यश्री शिवमुनि ने कहा कि मनुष्य को धर्म, ध्यान, तप और साधना से आत्मा पर विजय प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए, जो आत्मा पर विजय प्राप्त कर लेता है। इस लोक में ही नहीं परलोक में भी अनन्त सुखों का स्वामी होता है। उन्होंने कहा कि आत्मा पर विजय प्राप्त करने से मनुष्य के भीतर कषाय स्वत: नष्ट हो जाते हैं। वह आत्म विजयी होता है। आत्म विजयी होने के लिए स्वयं पर नियंत्रण करना भी जरूरी है। कुछ भी वस्तु प्राप्त करने से पहले स्वयं को जीत लो। ऐसा होने पर अपनी आत्मा का उद्धार जाएगा।
चातुर्मास संयोजक वीरेंद्र डांगी ने बताया कि शुभम मुनि की ओर से उत्तराध्ययन सूत्र का वाचन अनवरत जारी है।
प्रभु वाणी से बदलते हैं परिणाम
हुमड़ भवन में आचार्य सुनीलसागर के सप्त शिष्यों के सान्निध्य में सर्व दुख दारिद्रय निवारक विधान अनवरत जारी है। सुमित्र सागर महाराज ने इस मौके पर जैन रामायण कथा का मंचन किया। उन्होंने कहा कि रावण ने सीता हरण किया, मगर उसको विद्वानों, मैत्रियों, परिवारजनों के समझाने के ाबद भी मान कषाय से ग्रस्त होकर दुर्गति का शिकार हुआ।
सामूहिक ओली, हुए पारणे
जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के तत्वावधान में पन्यास प्रवर श्रुत तिलक विजय की निश्रा में 125 तपस्वियों ने ओली तप किया। संघ अध्यक्ष अध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र हिरण ने बताया कि तपस्या करने वाले तपस्वियों का आराधना भवन में संघ के पदाधिकारियों ने बहुमान किया। कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया ने बताया कि ओली करने वाले सभी तपस्वियों को सामूहिक पारणे लाभार्थी तेज सिंह-चंद्रा बाई गोरवाड़ा परिवार की ओर से कराए गए।
मिलें तो मुस्करा कर
आयड़ वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संस्थान के तत्वावधान में ऋषभ भवन में मुनि प्रेमचंद ने धर्मसभा में कहा कि आपसी संबंधों व सद्भाव का मानव जीवन में महत्व है। आप अन्यों से जैसा व्यवहार करेंगे, वैसी ही छवि सामने वाले के मन में आपके प्रति बनेगी। किसी से जब भी मिलें।