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वन्यजीव गणना 1 से, वाटर हॉल पद्धति मापेंगे जंगल का जीवन

गर्मी के मौसम में वन्यजीव 24 घंटे के भीतर कम से कम एक बार पानी पीने के लिए जलस्रोतों पर जरूर आते हैं। मचान पर तैनात गणनाकर्मी इन जलाशयों के पास बैठकर आने वाले हर वन्यजीव जैसे तेंदुआ, भालू, सियार, लोमड़ी, जंगली बिल्ली, नीलगाय, सांभर, चीतल, चिंकारा और जंगली सूअर की संख्या और व्यवहार दर्ज करेंगे। यह डेटा वन्यजीवों की वास्तविक संख्या और उनकी गतिविधियों को समझने में मदद करेगा।

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इस गणना में वाटर हॉल पद्धति का उपयोग किया जाएगा, जो वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद प्रभावी मानी जाती है।

इस गणना में वाटर हॉल पद्धति का उपयोग किया जाएगा, जो वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद प्रभावी मानी जाती है।

तीन अभयारण्यों में होगी कवायद, नई टाइमिंग से सटीक आंकड़ों की उम्मीद

उदयपुर. अरावली की गोद में बसे उदयपुर के जंगल इन दिनों एक खास तैयारी में जुटे हैं। भीषण गर्मी के बीच जहां वन्यजीव पानी की तलाश में जलस्रोतों की ओर रुख करते हैं, वहीं वन विभाग इन्हीं पलों को जंगल की धड़कन मापने के अवसर में बदल रहा है। 2026 की वन्यजीव गणना 1 मई की शाम 5 बजे से शुरू होकर 2 मई की शाम 5 बजे तक लगातार 24 घंटे चलेगी, इसमें जंगल के हर छोटे-बड़े जीव की मौजूदगी दर्ज की जाएगी।

पूर्णिमा की रात से बदला समय, 24 घंटे होगी निगरानी

इस बार वन विभाग ने गणना के समय में बदलाव किया है। जहां पहले यह प्रक्रिया सुबह 8 बजे से शुरू होती थी, वहीं अब इसे पूर्णिमा की शाम से अगले दिन की शाम तक किया जाएगा। पूर्णिमा की रोशनी में रात के समय भी वन्यजीवों की गतिविधियां अधिक स्पष्ट रूप से देखी जा सकेंगी, इससे गणना की सटीकता बढ़ेगी। इसको लेकर वन विभाग कार्यालय में प्रशिक्षण सत्र में 79 अधिकारियों और कर्मचारियों को इस नई प्रणाली के तहत कार्य करने की बारीकियां समझाई।---

वाटर हॉल पद्धति से होगी गणना

इस गणना में वाटर हॉल पद्धति का उपयोग किया जाएगा, जो वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद प्रभावी मानी जाती है। गर्मी के मौसम में वन्यजीव 24 घंटे के भीतर कम से कम एक बार पानी पीने के लिए जलस्रोतों पर जरूर आते हैं। मचान पर तैनात गणनाकर्मी इन जलाशयों के पास बैठकर आने वाले हर वन्यजीव जैसे तेंदुआ, भालू, सियार, लोमड़ी, जंगली बिल्ली, नीलगाय, सांभर, चीतल, चिंकारा और जंगली सूअर की संख्या और व्यवहार दर्ज करेंगे। यह डेटा वन्यजीवों की वास्तविक संख्या और उनकी गतिविधियों को समझने में मदद करेगा।

जयसमंद, सज्जनगढ़ और फुलवारी की नाल होंगे केंद्र

वन्यजीव गणना मुख्य रूप से जयसमंद वन्यजीव अभयारण्य, सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य और फुलवारी की नाल अभयारण्य में की जाएगी। ये क्षेत्र तेंदुए, भालू, हिरण प्रजातियों और विभिन्न पक्षियों के महत्वपूर्ण आवास माने जाते हैं। गणना से दो दिन पहले अभ्यास सत्र भी होगा। इसमें गणनाकर्ता अपने-अपने क्षेत्र, जानवरों के आने-जाने के रास्तों (एनिमल ट्रेल्स) और उनके व्यवहार को समझेंगे, ताकि मुख्य गणना के दौरान कोई त्रुटि न हो।---

प्रशिक्षण में सिखाई जंगल की भाषा

प्रशिक्षण सत्र में सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षक डॉ. सतीश शर्मा और सज्जनगढ़ जैविक उद्यान के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. हिमांशु व्यास ने कर्मियों को मचान की सही ऊंचाई, वन्यजीवों की पहचान, उनकी गतिविधियों को समझने और गणना के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी। इस दौरान उप वन संरक्षक यादवेन्द्र सिंह चुण्डावत सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने पूरे अभियान को गंभीरता और महत्व प्रदान किया।