
जिले में एक ओर जहां मूक पशु लम्पी वायरस के प्रहार से घायल हैं, वहीं दूसरी ओर जिले में पशु चिकित्सालयों में विभिन्न पदों की खाली कुर्सियां पूरी व्यवस्थाओं पर भारी पड़ रही है। हालात ये है कि विभाग जैसे-तैसे काम निकाल रहा है। यदि हालात भयावह हुए तो मुश्किलें खड़ी हो सकती है। जिले में वर्तमान में सभी 384 पशु चिकित्सा संस्थाओं पर 683 पद खाली पडे़ हैं। खास बात ये है कि जिन ग्रामीण क्षेत्रों में इन पशुओं के लिए सर्वाधिक पशु चिकित्सकों की जरूरत है, वहीं पद खाली पडे़ हैं।
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ये हैं हालात: पाॅली क्लीनिक में विभिन्न पदों में सर्वाधिक 13 पद रिक्त हैं, खेराड़ में 4, खेरवाड़ा में 5, कोटड़ा, कानोड़, सराड़ा, अग्गड़ में 5-5, मेरपुर, भबराणा, परसाद, सायरा, गोगुन्दा, लसाडि़या, धावड़ी, बाठेडा कलां, बेकरिया, थाम्बला, पाणुन्द, रख्यावल, जयसमन्द, चीरवा, तारावट, नीमड़ी, टीडी में 4-4 पद वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी, पशु चिकित्साधिकारी, वाहन चालक, एक्स-रे मैन, पशुधन सहायक, पशुधन परिचर सहित कई अन्य पद रिक्त हैं।
- जिले में वर्तमान में कुल 442 पशु चिकित्सा संस्थाएं (बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय-01, प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय-36, पशु चिकित्सालय-77, पशु आरोग्य चल इकाइयां-03 तथा पशु चिकित्सा उपकेन्द्र-325) स्वीकृत हैं।- जिले में 51 पशु चिकित्सा संस्थाओं के राजकीय भवन नहीं है। ये किराए के भवनों में संचालित है। निर्माण के लिए 772.62 लाख की राशि स्वीकृत की गई है।
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फिलहाल हमें उदयपुर जिले में 14 पशु चिकित्सक दिए गए थे, लेकिन 11 ने ज्वाइन कर लिया है। पूरे प्रदेश में 200 पशु चिकित्सकों को सरकार ने फिलहाल लिया है। हालांकि अभी जो-जो पद खाली हैं, उन्हें भरने की प्रक्रिया चल रही है।
सूर्यप्रकाश त्रिवेदी, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग उदयपुर