
उदयपुर . शास्त्री सर्कल स्थित दातापति हनुमानमंदिर के महंत मोहनानंद दांडी स्वामी (महंत मोहन गिरी) रविवार सुबह करीब 6.30 बजे देवलोकगमन हो गए। भक्तों और संतों ने मंदिर परंपरा के अनुसार मंदिर परिसर में ही महंत की समाधि की तैयारी शुरू कर दी। इसकी शिकायत पर प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची और समाधि मंदिर में नहीं, अन्यत्र देने की बात कही।
इस पर भक्त और संतों ने विरोध दर्ज करवाया। मंदिर परंपरा और समिति के दस्तावेज की जांचने के बाद अपराह्न में मंदिर में ही महंत को परंपरानुसार समाधि दी गई। भक्तों ने बताया कि देवलोक हुए महंत हनुमान मंदिर में गत 30 वर्ष से महंत थे। वे 96 वर्ष के थे। उन्होंने बताया कि पूर्व ट्रस्ट के कुछ सदस्यों ने मंदिर में समाधि देने की शिकायत की थी, लेकिन वर्तमान ट्रस्ट के सदस्यों और भक्तों ने महंत की लिखित अंतिम इच्छा और अन्य दस्तावेज प्रशासन को दिखाए।
साथ ही मंदिर परंपरा का हवाला भी दिया। इस पर दोपहर में मंदिर में समाधि की अनुमति दी गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ही संतों, महंतों और भक्तों की मौजूदगी में अपराह्न करीब 3.15 बजे परंपरानुसार विधि-विधान से महंत को मंदिर में समाधि दी गई।
महंत के देवलोक गमन की सूचना पर बड़ी संख्या में शहर तथा आसपास के क्षेत्र के संत, महंत और भक्त मंदिर पहुंचे। इनमें प्रमुख रूप से महंत सुरेशगिरी, महंत विरम, महंत हर्षिता दास, महंत ऊंकार दास, संत राधिका चरण, महंत इंद्रदेव दास सहित 50 से अधिक संत मंदिर पहुंचे। उनके अंतिम दर्शन करने के लिए भगवानसिंह, संग्राम सिंह, रघुवीरसिंह, मोहन औदिच्य, प्रकाश बिलौची, अशोक आमेटा सहित कई भक्त भी पहुंचे।
हुआ चरण पादुका पूजन
महंत की समाधि के बाद संतों और भक्तों की मौजूदगी में चरण पादुका पूजन की परंपरा हुई। इसमें संतों ने योगेश आमेटा और प्रवीण आमेटा से चरण पादुका का पूजन करवाया।