2 नवंबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

उदयपुर : 6 को धनतेरस से शुरू होगा दीपोत्सव, 8 को मनेगी दीपावली

6 नवंबर को धनतेरस के साथ पांच दिवसीय दीपोत्सव शुरू होगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 8 नवंबर रविवार को प्रदोषव्यापिनी अमावस्या में दीपावली मनाई जाएगी। इस दिन महालक्ष्मी और गणेश पूजन का विशेष महत्व रहेगा। प्रदोष काल शाम 5.49 से रात 8.13 बजे तक रहेगा। 9 नवंबर को अन्नकूट, 10 को गोवर्धन पूजा, 20 नवंबर को देवप्रबोधिनी एकादशी और 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा मनाई जाएगी।
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

उदयपुर

•

image

Mukesh Gaur

•

Updated: 2 Nov 2026, 6:09 PM IST

deepawali

demo pic

उदयपुर. कार्तिक मास में दीपोत्सव सहित कई प्रमुख धार्मिक पर्वों का विशेष संयोग रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 6 नवंबर को धनतेरस के साथ पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत होगी। इसके बाद 8 नवंबर रविवार को प्रदोषव्यापिनी अमावस्या में दीपावली मनाई जाएगी। इस दिन घरों और प्रतिष्ठानों में विधि-विधान से भगवान गणेश और माता महालक्ष्मी का पूजन किया जाएगा। 9 नवंबर को अन्नकूट महोत्सव और 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा होगी। इसके बाद 20 नवंबर को देवप्रबोधिनी एकादशी और 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।

ज्योतिषी पं. भगवती शंकर व्यास के अनुसार इस वर्ष दीपावली पर अमावस्या तिथि का प्रदोष काल में होना विशेष महत्व रखता है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार प्रदोषव्यापिनी अमावस्या में ही दीपावली और महालक्ष्मी पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है। इसी कारण 8 नवंबर को दीपावली मनाई जाएगी। इस दिन सुबह से लेकर रात्रि तक विभिन्न चौघड़िया और लग्न के अनुसार पूजन के शुभ मुहूर्त रहेंगे।

प्रदोषव्यापिनी अमावस्या पर 8 नवंबर को दीपावली

पं. व्यास के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि 8 नवंबर को सुबह 11.28 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ होकर 9 नवंबर को दोपहर 12.31 बजे तक रहेगी। 8 नवंबर को प्रदोष काल में अमावस्या तिथि विद्यमान रहने से इसी दिन दीपावली मनाना शास्त्रसम्मत रहेगा। इस दिन घरों, प्रतिष्ठानों और मंदिरों में दीप प्रज्वलित कर महालक्ष्मी पूजन किया जाएगा।

महालक्ष्मी पूजन के लिए ये रहेंगे शुभ मुहूर्त

दीपावली पर सुबह से लेकर रात्रि तक अलग-अलग चौघड़िया और लग्न में पूजन के शुभ अवसर रहेंगे।

चर, लाभ और अमृत चौघड़िया: सुबह 8.12 से दोपहर 12.19 बजे तक।

अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11.53 से दोपहर 12.37 बजे तक।

शुभ चौघड़िया: दोपहर 1.42 से 3.04 बजे तक।

प्रदोष काल में पूजन का विशेष महत्व

पं. व्यास के अनुसार दीपावली पर प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। 8 नवंबर को प्रदोष काल शाम 5.49 से रात 8.13 बजे तक रहेगा। इस दौरान माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करना शुभ रहेगा।

महालक्ष्मी पूजन के लिए लग्न

वृश्चिक लग्न: सुबह 7.25 से 9.42 बजे तक।

कुंभ लग्न: दोपहर 1.34 से 3.06 बजे तक।

वृषभ लग्न: शाम 6.14 से रात 8.11 बजे तक।

सिंह लग्न: रात 12.43 से 2.57 बजे तक।

धनतेरस से कार्तिक पूर्णिमा तक पर्वों का क्रम

6 नवंबर, शुक्रवार : धनतेरस

धनतेरस के साथ पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत होगी। इस दिन भगवान धन्वंतरि की जयंती भी मनाई जाएगी। यम दीपदान का समय सुबह 10.31 बजे से रहेगा। धन्वंतरि जयंती पर दोपहर 12 से 1.30 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके अलावा अभिजीत, गोधूलि और प्रदोष काल में भी शुभ कार्य किए जा सकेंगे। इस दिन धन, आरोग्य और सुख-समृद्धि की कामना के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी।

8 नवंबर, रविवार : दीपावली एवं महालक्ष्मी पूजन

कार्तिक अमावस्या के प्रदोषव्यापिनी होने से इसी दिन दीपावली मनाई जाएगी। घरों, प्रतिष्ठानों और मंदिरों में दीप सजाकर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन किया जाएगा।

9 नवंबर, सोमवार : अन्नकूट महोत्सव

दीपावली के अगले दिन अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा। प्रतिपदा तिथि दोपहर 12.31 बजे तक रहेगी। इस अवसर पर भगवान को विभिन्न प्रकार के पकवानों और व्यंजनों का भोग लगाकर अन्नकूट प्रसाद वितरित किया जाएगा।

10 नवंबर, मंगलवार : गोवर्धन पूजा

गोवर्धन पूजा के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की जाएगी। मंदिरों और घरों में गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाकर पूजा करने की परंपरा निभाई जाएगी।

20 नवंबर, शुक्रवार : देवप्रबोधिनी एकादशी

कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवप्रबोधिनी एकादशी मनाई जाएगी। स्मार्त मतानुसार एकादशी तिथि सुबह 7.15 बजे से रहेगी, जबकि वैष्णव संप्रदाय के अनुसार यह पर्व 21 नवंबर शनिवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं। इसके साथ ही चातुर्मास का समापन और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है।

24 नवंबर, मंगलवार : कार्तिक पूर्णिमा

कार्तिक मास का समापन कार्तिक पूर्णिमा के साथ होगा। इस दिन पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान, दान, दीपदान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व रहेगा। मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे।