
रूफटॉप सागा बाय लेक
उदयपुर. खूबसूरत लेक व्यू दिखाने की अंधी होड़ में उदयपुर का ऐतिहासिक ओल्ड सिटी क्षेत्र आग के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है। पुरानी हवेलियों और होटलों में रूफटॉप को सबसे ऊंचा और आकर्षक बनाने की प्रतिस्पर्धा छिड़ी हुई है। अधिक मुनाफे के चक्कर में संचालकों ने लोहे के गर्डर, टीन शेड और लकड़ी के तख्तों के सहारे 5वीं, छठी और 7वीं मंजिलें तान दी हैं। सुरक्षा के मानकों को दरकिनार कर 100 से ज्यादा रूफटॉप कैफे और रेस्टोरेंट बेधड़क संचालित हो रहे हैं। जगदीश चौक, लालघाट, माझी का घाट और चांदपोल जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि इन रूफटॉप्स पर देशी-विदेशी पर्यटकों से खान-पान के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम शून्य हैं। यदि कभी आग भड़क जाए या कोई अप्रिय घटना होती है, तो ऊपर बैठे पर्यटकों के पास सुरक्षित बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं होगा।
इन केसों से समझें कैसे हवा में लटके हैं रेस्त्रां
केस 1: चार मंजिला इमारत पर अवैध ढांचा
नजारा रेस्टोरेंट, गणगौर मार्ग
मूलतः चार मंजिला इमारत पर लोहे के पाइप और लकड़ी से 5वां व छठा तल तैयार कर रूफटॉप बनाया गया है। ओल्ड सिटी में सबसे ऊंचा होने का दावा करने वाले इस रेस्टोरेंट के छठे फ्लोर से नीचे देखने पर गहरी खाई जैसा दृश्य दिखता है, लेकिन किनारे पर सुरक्षा रेलिंग तक नहीं है। यहां चढ़ने-उतरने के लिए लोहे की बेहद संकरी और खड़ी सीढ़ियां हैं, जिनसे एक समय में केवल एक ही व्यक्ति गुजर सकता है।
केस 2: एस्थेटिक लुक में सूखी पॉम लीफ से सजाया
सन एंड मून रेस्टोरेंट, जगदीश चौक के पास
छत पर 'एस्थेटिक लुक' देने के लिए ज्वलनशील सिंथेटिक व सूखी घास और लकड़ी की फ्लोरिंग की गई है। एक के ऊपर एक तीन मंजिला टेम्परेरी कंस्ट्रक्शन कर रूफटॉप तान दिए हैं। जितनी ऊपर सीट चाहिए उतना ज्यादा चार्ज लगेगा। रूफटॉप पर सिटिंग कैपेसिटी 40 से 50 लोगों की है, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं।
केस 3: लग्जरी होटल में अवैध रूफटॉप
स्थान: सागा बाय लेक, लालघाट
पुरानी हवेली में संचालित लग्जरी होटल के टॉप फ्लोर पर अवैध रूफटॉप है। रूफटॉप से नीचे आने के लिए कोई इमरजेंसी एग्जिट नहीं है। यदि दूसरी या तीसरी मंजिल पर कोई हादसा होता है तो 5वीं मंजिल पर बैठे लोगों का नीचे उतरना नामुमकिन है।
केस 4: छतों पर धधक रहे किचन
स्थान: [मयूर कैफे]
चार मंजिला होटल के ऊपर नियम विरुद्ध 3 मंजिल का अस्थायी रूफटॉप रेस्टोरेंट खड़ा कर दिया है। यहां से बाहर निकलने का सिर्फ एक संकरा रास्ता है और सुरक्षा के बुनियादी उपाय भी गायब हैं।
बिल्डिंग बायलॉज से बचने के रास्ते खोजे
नगर निगम के बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार ओल्ड सिटी में पक्के निर्माण और ऊंचाई को लेकर सख्त सीमाएं तय हैं। हालांकि, संचालकों ने इससे बचने के भी रास्ते खोज लिए हैं। प्री-फैब्रिकेटेड लोहे के एंगल, लकड़ी और फाइबर शीट्स से अस्थायी शेड के नाम पर ढांचे खड़े कर लिए हैं। हकीकत यह है कि इन अस्थायी ढांचों पर भारी-भरकम फर्नीचर, किचन उपकरण और रोजाना सैकड़ों लोगों का भार डाला जा रहा है।
ये खतरे बन सकते जानलेवा
-पुरानी हवेलियों में केवल एक ही संकरा प्रवेश द्वार और सीढ़ी है। भगदड़ की स्थिति में लोगों का दम घुटना तय है।
- ओल्ड सिटी की गलियां इतनी संकरी हैं कि दमकल का घटना स्थल तक पहुंचना मुश्किल है।
-रूफटॉप्स को सुंदर दिखाने के लिए लगाया गया घास का कारपेट, लकड़ी के तख्ते, पर्दे और कुशन आग को भड़काने का काम करेंगे।
अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल
शहर में नियमों को ताक पर रखकर 6-6 मंजिलों का अवैध निर्माण खड़ा हो गया, लेकिन जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं। सवाल यह है कि क्या कार्रवाई के लिए किसी हादसे का इंतजार किया जा रहा है? नीचे होटल के नाम पर जारी फायर एनओसी की आड़ में ऊपर 3-3 अवैध रूफटॉप फ्लोर संचालित किए जा रहे हैं। क्या प्रशासनिक टीमों ने कभी निरीक्षण नहीं किया? अग्निकांडों और हादसों से सबक लेने के बावजूद बिना इमरजेंसी एग्जिट और सुरक्षा मानकों के चल रहे इन कमर्शियल ठिकानों पर आखिर कब एक्शन होगा।
मामला संज्ञान में आया है। ओल्ड सिटी में बिना अनुमति और सुरक्षा मानकों के विपरीत संचालित रूफटॉप रेस्टोरेंट्स का सर्वे करवाया जाएगा। नियमों का उल्लंघन मिलने पर प्रतिष्ठानों को सीज करने सहित सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पारस सिंघवी, महापौर
Updated on:
1 Nov 2026, 5:57 PM IST
Published on:
1 Nov 2026, 5:57 PM IST
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