
चंदन सिंह देवड़ा/उदयपुर. अब तक किसान मक्का दाना निकालने के लिए देशी तरीके से छीले हुए भुट्टों को पीटता था। इसमें काफी श्रम व समय लगता था। इस परेशानी से अब किसानों को निजात मिलेगी। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के फार्म मशीनरी विभाग ने सोलर थ्रेसर इजाद किया है। यह थ्रेसर पहले पैडल आधारित था, जिसे अपडेट करते हुए सोलर ऑपरेटर बना दिया है। एक घंटे में यह थ्रेसर डेढ़ क्विंटल मक्का दाने निकालता है। खास बात यह कि इसमें बिना छिले भुट्टे डाल सकते हंै। दाने एक दम सफाई से निकलते हैं और टूटते भी नहीं है।
हायला गांव में किया प्रयोग...
एमपीयूएटी के रिसर्च डायरेक्टर डॉ. अभयकुमार मेहता ने बताया कि विवि ने सायरा के पास हायला गांव को गोद ले रखा है। उस गांव में इस सोलर मक्का निकासी थ्रेसर को रखवाया गया। गांव के कई छोटे किसानों ने इसका स्वयं उपयोग कर मक्का दाना निकाला।
1 एचपी डीसी मशीन से चलता थ्रेसर
फार्म मशीनरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सांवलसिंह मीणा ने बताया कि पहले पैडल थ्रेसर बनाया, जिसे डायरेक्टर रिसर्च के निर्देशन में एमटेक प्रोजेक्ट में शीतल सोनावने की ओर से सोलर पैनल में कन्वर्ट किया गया। इसमें 1 एचपी डीसी मोटर का प्रयोग किया गया है। 1 किलोवाट के तीन पैनल लगाए गए है। पैनल स्टेण्ड अर्फोडेबल होने से इसे खेतों में इधर-उधर आसानी से ले जाया जा सकता है।
इनका कहना....
एमपीयूएटी ने अभी एक सोलर मक्का थ्रेसर बनाया, जिसकी लागत 1 लाख 10 हजार आई है। जरूरत के हिसाब से आगे और बनाएंगे। इस तकनीक से किसानों का समय और श्रम बच गया है। कटाई के बाद भुट्टे छीलने में काफी समय लगता था लेकिन अब राहत मिलेगी।
डॉ. अभय कुमार मेहता, डायरेक्टर (रिचर्स )एमपीयूएटी
सोलर थ्रेसर का प्रयोग हायला एवं आसपास के गांव में किया गया है। सूर्य की रोशनी में किसान कुछ ही घंटों में मक्का निकाल सकता है। कई किसानों ने इसका उपयोग करते हुए सराहना की है।
डॉ. सांवलसिंह मीणा, असिस्टेंड प्रोफेसर एमपीयूएटी