Shahadat Ko Salam: उदयपुर। जब कोई सैनिक शहीद होता है तो उसे सिर्फ परिवार नहीं खोता, बल्कि पूरा देश खोता है। शहीद की मां बेटे की शहादत पर गर्व महसूस करती है, जब मरणोपरांत उसे शौर्य चक्र से नवाजा जाता है। मां ने बेटे के रूप में बहुत-कुछ खो दिया, लेकिन बेटे की शहादत ने जो दिया, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
Shahadat Ko Salam: उदयपुर। जब कोई सैनिक शहीद होता है तो उसे सिर्फ परिवार नहीं खोता, बल्कि पूरा देश खोता है। शहीद की मां बेटे की शहादत पर गर्व महसूस करती है, जब मरणोपरांत उसे शौर्य चक्र से नवाजा जाता है। मां ने बेटे के रूप में बहुत-कुछ खो दिया, लेकिन बेटे की शहादत ने जो दिया, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
भावुक कर देने वाली ये बातें उदयपुर के शहीद मेजर मुस्तफा बोहरा की मां फातिमा ने साझा की। मौका था राजस्थान पत्रिका कार्यालय में सम्मान समारोह का। पत्रिका के शहादत को सलाम अभियान के तहत शहीद की मां का सम्मान किया गया।
शहीद की मां फातिमा कहती है कि देश ने 5 जुलाई 2024 को शौर्य चक्र देकर मेजर मुस्तफा को पूरा सम्मान दिया, लेकिन आश्चर्य है कि उदयपुर का स्थानीय प्रशासन उसके नाम को अमर नहीं कर पाया, जिसका वह हकदार था। नियमानुसार शहीद के नाम से स्कूल और सड़क का नामकरण होना चाहिए था, लेकिन तीन साल बाद भी ऐसा नहीं हो पाया।
उदयपुर जिले के खेरोदा हाल शहर के बलीचा निवासी रहे मेजर मुस्तफा भी उन शहीदों में से है, जो खास मिशन पर जाते समय शहीद हो गए। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्र में 21 अक्टूबर, 2022 को हेलीकॉप्टर मिशन में जान गंवाई थी। सन 2012 में एनडीए में भर्ती होकर 2018 में वे सेना का हिस्सा बने थे। निकाह के 6 दिन बाद ही वे शहीद हो गए।
राजस्थान पत्रिका के शहादत को सलाम अभियान के तहत उदयपुर के शहीद मेजर मुस्तफा बोहरा की मां फातिमा का राजस्थान पत्रिका कार्यालय में आयोजित समारोह में सम्मान किया गया।
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