
भुवनेश पंड्या/उदयपुर . महाराणा भूपाल हॉस्पिटल ने सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से डेढ़ करोड़ रुपए की यूसी तो मांग ली है, जबकि हकीकत में विभाग के पास केवल दो लाख रुपए का ही उपयोगिता प्रमाणपत्र है। गत एक वर्ष में महाराणा भूपाल हॉस्पिटल ने विभाग को विभिन्न कार्यों के एवज में जो राशि जारी की गई हैं, उसमें से कितनी खर्च की गई और कितनी बकाया है, इसकी जानकारी खुद चिकित्सालय प्रशासन के पास नहीं। पत्रिका ने सोमवार के अंक में पीडब्ल्यूडी और हॉस्पिटल की लड़ाई, अटके करोड़ों के काम शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर स्थिति को उजागर किया था।
हकीकत: अब तक तो खाते में ही नहीं पहुंचे
विभागीय सूत्रों के अनुसार कुछ दिन पहले हॉस्पिटल ने पीडब्ल्यूडी को एक करोड़ रुपए जारी किए मगर अब तक सार्वजनिक निर्माण विभाग के खाते में यह राशि नहीं पहुंची है। सूत्रों के अनुसार ब्लड बैंक में काम के लिए 29 लाख रुपए का टेंडर किया गया था, लेकिन चुनावी आचार संहिता के कारण यह काम अटक गया। दो लाख रुपए गत वर्ष जोइनरी वर्क रिपेयरिंग के लिए दिया था। सार्वजनिक निर्माण विभाग के पास केवल यही यूसी उपलब्ध है।
दो किस्तों में दी राशि
चिकित्सालय ने विभिन्न कार्यों के लिए दो किस्तों में एक करोड़ और 50 लाख रुपए सार्वजनिक निर्माण विभाग को जारी किए थे। चिकित्सालय प्रशासन ने अब पीडब्ल्यूडी से राशि जारी करने की तिथि, चेक संख्या, समय-समय पर करवाए गए कार्य और खर्च का ब्योरा मांगा है।
मांगा है ब्योरा
हमने सार्वजनिक निर्माण विभाग से इस खर्च की विस्तार से जानकारी मांग ली है। विभाग से यह भी कहा है कि पिछले प्रस्तावों को भी स्पष्ट करें, ताकि सरकार से बजट मांगा जा सके।
डॉ लाखन पोसवाल, अधीक्षक महाराणा भूपाल हॉस्पिटल उदयपुर
यह यूसी डेढ़ करोड़ की नहीं, बल्कि करीब दो लाख रुपए की यूसी बना रहे हैं। जो कार्य चल रहे हैं, उनकी प्रोग्रेस बता देंगे। जो कार्य बिजली से जुड़ा है, वह सिविल कार्यों में शामिल नहीं है, उसकी यूसी संबंधित विभाग उपलब्ध करवाएगा।
डीसी माथुर, अधीक्षण अभियन्ता सार्वजनिक निर्माण विभाग उदयपुर