औषधीय गुणों से भरी है जोगण बेल, प्रदेश से लुप्त होने के कगार पर
मुकेष पुरोहित. फलासिया . अरावली पर्वतमाला में कई ऐसी जड़ी-बूटियां है, जो लुप्त होने के कगार पर है। कई ऐसे पौधे और बेलें हैं, जो परम्परागत चिकित्सा की जानकारी के अभाव में उनका संरक्षण नहीं हो पा रह है। उन्हीं में से एक है, जोगण बेल।
प्रदेश में कुछ जगहों पर ही पाई जाने वाली जोगण बेल का संरक्षण झाड़ोल अंचल में देखा जा सकता है। यहां मादड़ी क्षेत्र में पारगीयापाड़ा के झर महादेव के जंगल में उपलब्ध जोगण बेल चार किलोमीटर के दायरे में फैली है। खास बात ये कि इस बेल की मुख्य जड़ कहां है, पता नहीं लगाया जा सकता। संभवतया यह प्रदेशभर में सबसे अधिक क्षेत्र में फैली बेल है।
प्रदेश में यहां उपलब्धता
प्रदेश में चितौडग़ढ़-भीलवाडा सीमा पर स्थित मेनाल झरना, चम्बल नदी के तट और बारां जिले के खोह में पाई जाती है। विंध्याचल पर्वतमाला में जहां नमी रहती है, वहां भी जोगण बेल पनपती है। जहां 1200 मिमी से ज्यादा बारिश होती है, वर्षभर नमी रहती है, उन जगहों पर भी यह बेल पाई जाती है।
परम्परागत चिकित्सा में उपयोगी
परंपरागत चिकित्सा में जोगण बेल को काफी महत्वपूर्ण औषधी माना गया है। पम्परागत चिकित्सा पर कार्य कर रही जागरण जन विकास समिति के डॉ. रामकिशोर देसवाल ने बताया कि जोगण बेल के तने और छाल का उपयोग हड्डी जोडऩे में किया जाता रहा है। इसके तने में केल्शियम बहुतायत में होता है, जो हड्डी जोडऩे में सार्थक है। समिति ने गुणियों को प्रशिक्षण देकर कई लोगों का उपचार इस बेल से किया है। जोगण बेल के पत्ते अधिक लंबे-चौड़े होने से पत्तल-दौने बनाने में भी इस्तेमाल होता रहा है।
आदिवासी करते हैं पूजा
कम जगहों पर उपलब्धता और उपयोगिता के कारण जोगण बेल पूजनीय हो गई। आदीवासी अंचल में इसकी पूजा की जाती है। इसके पत्ते तोडऩे से पहले भी आदिवासी जन ईश्वर को साक्षी मानकर पूजा करते हैं।
संरक्षण करना जरुरी
जोगण बेल मादड़ी में संम्भवतया सबसे अधिक क्षेत्र में फैली है। ये एक दुर्लभ प्रजाति की बेल है, जो धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है। ग्रामीणों को वन विभाग का सहयोग करके इसे बढ़ावा देना चाहिए।
सतीश शर्मा, पूर्व सहायक वन संरक्षक, उदयपुर
स्थानीय लोक संस्कृति एवं पारम्परिक औषधी के महत्व वाली वानस्पतिक प्रजातियों का धरोहर के रूप में संरक्षण करना जरुरी है। अन्यथा ये विलुप्त हो जाएगी।
डॉ. जीपी. सिंह झाला, लोक वनस्पति विशेषज्ञ