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- मोहम्मद इलियास
उदयपुर। वे खुद गुड्डे गुडिय़ा लेकर घर परिवार के किरदारों को जीवंत करने में मशगूल थीं, लेकिन जमाने की गंदी नजरों से बच नहीं पाईं। महज 13 से 16 साल की उम्र में वे गर्भवती हो गईं। कुछ मां बनने की तैयारी में हैं तो कुछ की गोद भर गई।
यह सच उदयपुर जिले का है जहां प्यार के मोहजाल में फंसी किशोरियां नारी निकेतन में प्रसव पीड़ा का दर्द झेल रही हैं। एक-दो नहीं बल्कि तीन साल में 23 नाबालिगों ने प्रसव पीड़ा झेली और दो गर्भवती हैं। सभी लड़कियां गर्भ में पल रहे शिशु को जन्म देकर अपनाना चाहती हैं। अधिकांश लड़कियां जनजाति समाज से है, जिनमें सर्वाधिक बांसवाड़ा व प्रतापगढ़ की हैं। प्रेमी के संग भागी नाबालिग गर्भवती लड़कियों की डिलीवरी करवाने के मामले में राजस्थान में उदयपुर अव्वल है।
काफी कानूनी दांव पेच: कांउसलिंग के बावजूद कुछ लड़कियां प्रेमी के संग जाने की जिद पर अड़ी रहकर बच्चा चाहती हैं। नारी निकेतन प्रबंधन ने 23 बच्चियों को उनके मां-बाप के सुपुर्द किया है। महज एक ने ही शिशुगृह में बच्चा सुपुर्द किया और स्वयं माता-पिता संग गई।
प्रेमी सलाखों में, वे नारी निकेतन में
नाबालिग किसी न किसी तरह से अपने प्रेमी के संग फरार हो गईं। फरार होने का पता चलने पर परिजनों ने उदयपुर संभाग के अलग-अलग थानों में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करवाई। तलाशी के बाद पुलिस ने जब उन्हें बरामद किया तो वे गर्भवती थीं। नाबालिग होने से परिजनों के बयानों के आधार पर प्रेमी सलाखों में पहुंच गए लेकिन मजबूर मां-बाप ने समाज में इज्जत की मजबूरी पर लड़कियों को नहीं अपनाया। ऐसे में लड़कियां नारी निकेतन पहुंच गई।
- डिलीवरी की स्थिति में आने वाली लड़कियों की विशेष देखरेख की जाती है। काउंसलिंग में उन्हें सब कुछ समझाया जाता है। डिलीवरी के बाद कोर्ट व सीडब्ल्यूसी के आदेश पर अग्रिम कार्रवाई की
जाती है।
वीना मेहरचंदानी, नारी निकेतन अधीक्षक