उदयपुर

सिक्सलेन निर्माण के नाम पर बरती जा रही लापरवाही ने ग्रामीण इलाकों में बढ़ाई परेशानी

national highway मेला स्थल तक आ रहे वाहनों के फंसने का सिलसिला जारी, वैकल्पिक मार्ग पर नहीं हुआ डामर बढ़ा रहा है परेशानी
2 min read
सिक्सलेन निर्माण के नाम पर बरती जा रही लापरवाही ने ग्रामीण इलाकों में बढ़ाई परेशानी
सिक्सलेन निर्माण के नाम पर बरती जा रही लापरवाही ने ग्रामीण इलाकों में बढ़ाई परेशानी

उदयपुर/ मेनार. national highway उदयपुर-चित्तौडगढ़़ राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 76 पर जारी सिक्सलेन निर्माण में बरती जा रही खामियां सड़क किनारे बसे गांवों के वाहन सवारों और आम राहगीरों के लिए नित नई मुसीबत खड़ी कर रही है। निर्माण के बीच वैकल्पिक मार्ग पर अस्थायी डामरीकरण के अभाव में स्थानीय लोगों का क्षेत्र में रूकना और रहना दुश्वार हो चला है। धूल के गुबार से आम जिंदगी परेशान हो चुकी है। दूसरी ओर यहां मेला स्थल पर पहुंचने वाले वाहन भी अस्थायी मार्ग की चुनौतियों को झेलते हुए कीचड़ में फंस रहे हैं। निर्माण खामियों के बीच ही उदयपुर जाने वाली यात्री बसों, कार सवारों एवं अन्य लोगों को दूरी तय करने में करीब 35 मिनट अतिरिक्त लग रहे हैं। बावजूद इसके निर्माण से जुड़ी ठेका एजेंसी, हाई-वे प्राधिकरण एवं प्रशासनिक अमला मामले को लेकर मौन साधे हुए है।
बता दें कि सिक्सलेन निर्माण के दौरान खोदी गई सड़कें और विकल्प के तौर पर दिए गए मार्ग पर डामरीकरण करने में कोताही बरती जा रही है। इसके चलते वाहनों के पहियों के साथ महिन मिट्टी हवा में गुबार बनकर लोगों को सांस संबंधित बीमारियां दे रही है। धूल के गुबार के बीच वाहन सवारों को विशेष तौर पर दुपहिया सवारों को आगे चलते हुए वाहन की दूरी का पता नहीं चल रहा। पुलिया निर्माण वाले हिस्सों में ऐसी समस्याएं ज्यादा घर कर रही हैं। पुलिया निर्माण के बीच वैकल्पिक मार्ग की खामियों के कारण मेनार में आयोजित 7 दिवसीय मेले में पहुंचने वाले लोगों के वाहन बिना साइन बोर्ड के गफलत का शिकार हो रहे हैं। गफलत में ही वाहन उबड़-खाबड़ जगहों पर उलझते देखें जा रहे हैं।

क्रोसिंग मार्ग को खोदकर खुला छोड़ा
इधर, मेनार डाक बंगला के निकट बायपास निर्माण कार्य में भी तकनीकी खामी से आमजन परेशान है। संवेदक स्तर पर निर्माण के बाद डामरीकरण कार्य भी नहीं कराया गया। वहीं मेनार कस्बे की तरफ जाने वाले पुलिया मार्ग को आवाजाही के लिए खोल दिया गया। समतल मार्ग के अभाव में आए दिन वाहन दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। सड़क के गड्ढों में भरा बरसाती पानी कीचड़ में तब्दील होकर नित नई चुनौती खड़ी कर रहा है। बेरुखी ही है कि अधूरे निर्माण और डायवर्जन को लेकर यहां कोई साइन बोर्ड भी नहीं लगाए गए। रिफ्लेक्टर तो दूर रेत के कट्टे भी किनारे रखने से परहेज किया गया है।

मौका देख कार्रवाई
मेनार डाक बंगले के समीप पुलिया निर्माण और मिट्टी भराव कार्य शुरू हुआ है। national highway बायपास पर डामरीकरण सही से नहीं हुआ है तो मौका देखकर इसमें सुधार कराया जाएगा।
पराग शर्मा, प्रबंधक, हाइवे निर्माण टाटा कंपनी प्रोजेक्ट

Published on:
23 Oct 2019 06:00 am