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उदयपुर नगर निगम चुनाव: नाम वापसी से पहले बड़ा सियासी उलटफेर, बैकफुट पर आए निर्दलीय, क्या मान गए कांग्रेस के बागी?

उदयपुर नगर निगम चुनाव में नाम वापसी से पहले कांग्रेस ने लगभग डैमेज कंट्रोल कर लिया है। चुनाव में खड़े 22 में से ज्यादातर बागियों को पार्टी पदाधिकारियों ने बातचीत कर मना लिया है, जिससे 8 निर्दलीय प्रत्याशी बैकफुट पर आ गए हैं। वार्ड 12 में दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने एक साथ पर्चा वापस लिया।
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udaipur civic polls

उदयपुर नगर निगम चुनाव 2026 (पत्रिका फाइल फोटो)

Udaipur Municipal Corporation Elections: उदयपुर नगर निगम चुनाव के 80 वार्डों में बुधवार को आठ निर्दलीय प्रत्याशियों ने अपने नाम वापस ले लिए। नाम वापसी के बाद अब प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला बनाने और समीकरण साधने की कोशिशें तेज हो गई हैं। वार्ड-12 में दो निर्दलीयों ने एक साथ नामांकन वापस लिया, जबकि वार्ड-5, 9, 14, 33, 61 और 80 में भी प्रत्याशियों के मैदान से हटने से मुकाबले के समीकरण बदले हैं।

बता दें कि गुरुवार को नाम वापसी का अंतिम दिन है। नामांकन वापस लेने वाले प्रत्याशियों में वार्ड-80 से हितेश कुमार प्रजापत, वार्ड-5 से प्रताप सिंह चौहान और वार्ड-61 से सुशीला सुथार शामिल हैं। वहीं, वार्ड-12 से राकेश सेन और दिनेश वसीटा ने अपने पर्चे वापस लिए। इसके अलावा वार्ड-9 से रवि नलवाया, वार्ड-33 से अशोक कुमार शाह और वार्ड-14 से हर्ष वैष्णव ने भी चुनावी मैदान से अपनी दावेदारी वापस ले ली।

वहीं, टिकट वितरण के बाद कांग्रेस के सामने खड़ा हुआ बगावत का संकट अब नाम वापसी के अंतिम दिन निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरे 22 बागी प्रत्याशियों को मनाने के लिए शहर जिला और देहात कांग्रेस कमेटी की ओर से बनाई समन्वय टीमों ने मोर्चा संभाल रखा है।

कांग्रेस पदाधिकारियों का दावा है कि अधिकांश बागियों से बातचीत हो चुकी है और उन्हें मना लिया गया है। ऐसे में नामांकन वापस लेने की अंतिम समय-सीमा गुरुवार तक कई बागियों के मैदान से हटने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम तस्वीर नाम वापसी के बाद ही साफ होगी।

कांग्रेस के लिए बागियों का मैदान में उतरना इसलिए भी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कई वार्डों में ये प्रत्याशी पार्टी के ही स्थानीय कार्यकर्ताओं और परंपरागत वोट बैंक के बीच सेंध लगा सकते हैं। यही वजह है कि पार्टी ने नामांकन के बाद से ही बागियों को मनाने के लिए अलग-अलग स्तर पर संपर्क शुरू कर दिया। नेताओं और पदाधिकारियों की टीमें वार्डवार बागी प्रत्याशियों से बातचीत कर उन्हें पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में बैठाने का प्रयास कर रही है।

खुलने लगे चुनावी कार्यालय

बागियों को मनाने की कोशिशों के बीच वार्डों में चुनावी गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। कई प्रत्याशियों ने अपने चुनावी कार्यालय खोल दिए हैं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। कार्यालयों में वार्डवार रणनीति बनाई जा रही है और मतदाताओं से संपर्क के लिए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जा रही है।

इन वार्डों में कांग्रेस के बागी मैदान में

कांग्रेस के बागियों की सूची 22 प्रत्याशियों तक पहुंची है। इनमें वार्ड-7 से भगवतीलाल मेघवाल, वार्ड-8 से नाजनीन और कौसर परवीन, वार्ड-9 से रवि नलवाया, वार्ड-10 से शाकीब, वार्ड-12 से भूपेन्द्र शर्मा और मुजफ्फर हुसैन, वार्ड-13 से संतोष कटारा, वार्ड-14 से विजय शंकर कुमावत, वार्ड-22 से मोहम्मद जफर जिलानी और वार्ड-25 से दौलतराम साहू शामिल हैं।

इसी तरह वार्ड-29 से गणेश शर्मा, वार्ड-31 से रूबीना फारूख कुरैशी, वार्ड-39 से चन्द्रशेखर सांखला, वार्ड-41 से सत्यनारायण गमेती, वार्ड-51 से आरुष अरोड़ा और दीपक चौधरी, वार्ड-54 से देवेन्द्र माली और हार्दिक चौर्डिया, वार्ड-59 से मीना खटीक तथा वार्ड-66 से संजय भगतानी और विकास शर्मा निर्दलीय के रूप में चुनाव मैदान में हैं।

प्रत्याशियों की रणनीति बदलेगी

नामांकन वापसी के साथ ही अब राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के सामने मतदाताओं को पक्ष में करने की चुनौती बढ़ गई। निर्दलीय की मौजूदगी कई वार्डों में वोटों के बंटवारे का कारण बन सकती थी। ऐसे में कुछ निर्दलीयों के मैदान से हटने के बाद दलों के प्रत्याशियों के लिए मुकाबले का गणित भी बदल सकता है।