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उदयपुर : 179 पार्कों के हालः आधे बदहाल, कुछ की कंगाली से बिगड़ी चाल…एक सवाल-कहां खेले हमारे लाल

उदयपुर के 179 निगम पार्कों में करीब आधे ही नियमित देखरेख में हैं, जबकि कई पार्क बदहाल हैं और नए इलाकों में हरित क्षेत्र की कमी है। नगर निगम चुनाव में पार्कों की बदहाली स्थानीय मुद्दा बन रही है और लोगों का सवाल है—जब जमीन है तो बच्चों के खेलने के लिए पार्क कब विकसित होंगे?
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arial view of udaipur city

लेकसिटी का सबसे बड़ा ऑक्सीजन हब गुलाब बाग बढ़ते कंक्रीट के शहर के बीच हरियाली का सुकून दे रहा है। घने पेड़-पौधों और खुले वातावरण के बीच यहां सुबह-शाम बड़ी संख्या में शहरवासी सैर और व्यायाम के लिए पहुंचते हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच गुलाब बाग शहर के लिए हरियाली और स्वच्छ हवा का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। ऐसे में बढ़ते शहर के साथ ही ऐसे और हरित पार्कों की जरूरत भी महसूस होने लगी है। फोटो प्रमोद सोनी ड्रोन सहयोग मुक्तेश सोनी

उदयपुर. लेकसिटी को ग्रीन सिटी भी कहा जाता है। कारण फाइलों में नगर निगम के नाम से 179 पार्क दर्ज हैं। हालांकि इन पार्कों में से आधे की ही देखरेख हो रही है। निगम ने 90 पार्क गोद दे रखे हैं, जिनकी देखरेख के लिए हर समिति को 4 से 5 हजार रुपए प्रतिमाह प्रोत्साहन राशि दी जाती है। बाकी पार्कों की हालत भी ठीक नहीं है। कहीं झाड़-झंखाड़ हैं, कहीं सफाई के बाद फिर वही हालात। कहीं पार्क के नाम पर छोड़ी गई जमीन आज भी विकसित होने का इंतजार कर रही है। अब नगर निगम चुनाव में यही पार्क सड़क, नाली और सफाई के साथ स्थानीय मुद्दा बनने लगे हैं। हाल ही सरकार और न्यायालय के निर्देशों के बाद निगम ने पार्कों की सुध ली और वहां सफाई करवाई। लेकिन सवाल यह है कि सिर्फ सफाई करवाने मात्र से पार्क विकसित हो जाएंगे या उनकी नियमित देखरेख की भी व्यवस्था होगी? निवर्तमान पार्षदों पर भी आरोप लगते रहे हैं कि उन्होंने अपने वार्डों में पार्क विकसित कराने, बदहाल पार्कों को दुरुस्त कराने और अधिक से अधिक पार्कों को गोद दिलाने को प्राथमिकता नहीं दी।

जमीन तो छोड़ी पर बन नहीं पाए पार्क

शहर के कई इलाकों में पार्क के लिए जमीन तो छोड़ी गई, लेकिन कम जगह के कारण वहां पार्क विकसित नहीं हो सके। ऐसी जगहों का इस्तेमाल बच्चे खेलने के लिए करते हैं। कुछ स्थानों पर पार्क के लिए छोड़ी गई जमीन अब भी खाली पड़ी है। हिरणमगरी, प्रतापनगर, गोवर्धनविलास, भूपालपुरा और मल्लातलाई सहित कई इलाकों में ऐसी जगहें हैं, जहां पार्क की जमीन उपलब्ध होने के बावजूद उनका समुचित विकास नहीं हुआ।

पूजा ने दिखाई राह, मीरा ने खोली पोल

हिरणमगरी का पूजा पार्क शहर में सामुदायिक भागीदारी का उदाहरण है। वहां समिति पार्क की देखरेख करती है और निगम से प्रोत्साहन राशि समय पर नहीं मिलने के बावजूद स्थानीय लोग मिलकर उसकी व्यवस्था संभालते हैं। पूरे मोहल्ले के लोग इस पार्क का उपयोग करते हैं। इसके उलट अंदरूनी शहर में मीरा पार्क प्रमुख पार्कों में शामिल है, लेकिन इसकी स्थिति खराब है। अव्यवस्था के कारण स्थानीय लोगों को बेहतर सार्वजनिक हरित क्षेत्र नहीं मिल पा रहा। ऐसे में इस क्षेत्र के लिए गुलाबबाग ही प्रमुख विकल्प रह जाता है।

हाथी पार्क से पार्किंग तक... डूबी व्यवस्था

टाउनहॉल क्षेत्र का हाथी पार्क कभी शहर की पहचान माना जाता था। बाद में पार्किंग के नाम पर इसका स्वरूप बदल दिया गया। पार्किंग बनाई लेकिन व्यवस्था ज्यादा दिन नहीं चल सकी। अब वहां जलभराव जैसी समस्या भी सामने आने लगी है। लोगों का सवाल है कि जिस जगह को बेहतर सार्वजनिक सुविधा के रूप में विकसित किया जा सकता था, वह आखिर किस योजना के तहत बिगड़ती चली गई?

नए इलाकों में बिन पार्क सब सूना

नगर निगम की सीमा बढ़ने के साथ शहर के बाहरी और नए इलाकों में आबादी तो बढ़ी, लेकिन पार्क और सार्वजनिक हरित क्षेत्र उस गति से विकसित नहीं हुए। सोभागपुरा, बेदला, बेदला खुर्द, बड़गांव, अंबेरी, सापेटिया, देबारी, जिंक स्मेल्टर, बेड़बास, रेबारियों का गुड़ा, ढिकली, भोइयों की पचोली, डांगियों की पचोली, कमलोद, मनवाखेड़ा, खरबड़िया, कानपुरा, बलीचा, तीतरड़ी और फांदा जैसे इलाकों में पार्क नहीं हैं।

पार्कों के लिए निगम ये करे

- हर पार्क का डिजिटल रजिस्टर बने जमीन, क्षेत्रफल, सुविधाओं और मौजूदा स्थिति की जानकारी दर्ज कर सार्वजनिक की जाए।

- पार्कों की नियमित देखरेख हो, गोद दिए और अन्य पार्कों के लिए देखरेख व्यवस्था तय हो।

- छोटे पार्कों का बेहतर उपयोग हो बच्चों के खेल क्षेत्र, बुजुर्गों के बैठने और हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किए जाएं।

- खाली पड़ी पार्क भूमि सुरक्षित हो चारदीवारी, पौधरोपण और नियमित पानी की व्यवस्था की जाए।

- बड़े पार्कों का रखरखाव सुनिश्चित हो, स्थानीय समितियों की भागीदारी से वार्षिक रखरखाव व्यवस्था लागू की जाए।

- नए इलाकों में नए पार्क विकसित हों, तेजी से विकसित हो रही कॉलोनियों में पार्कों के लिए भूमि चिन्हित कर विकास किया जाए।

- पार्कों की निगरानी हो, हर वार्ड में पार्कों की स्थिति की नियमित समीक्षा और खराब होने पर तत्काल सुधार की व्यवस्था हो।

इलाके में आबादी बढ़ रही है, लेकिन बच्चों के लिए पार्क नहीं है। खाली जगह हैं, लेकिन उनका विकास नहीं किया गया। मजबूरी में बच्चे सड़क, कॉम्प्लेक्स या खाली भूखंडों में खेलते हैं।

नवीन चित्तौड़ा, गोवर्धनविलास

हमारे पास मीरा पार्क के अलावा कोई बड़ा पार्क नहीं है, लेकिन इसकी हालत ऐसी है कि परिवार बच्चों को लेकर जाने से बचते हैं। सफाई और नियमित देखभाल की जरूरत है।

भगवतसिंह राठौड़, भटियानी चौहट्टा

मोहल्ले के लोग मिलकर पार्क की देखरेख कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि निगम भी समय पर प्रोत्साहन राशि और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराए, ताकि पार्क की व्यवस्था और बेहतर हो सके।

डॉ.प्रीति जैन, हिरणमगरी

कई जगह पार्क के लिए जमीन छोड़ी गई है, लेकिन विकास नहीं हुआ। चुनाव में प्रत्याशियों से हमारा सीधा सवाल है कि पार्क कब विकसित होगा और इसकी नियमित देखरेख कौन करेगा?

जितेन्द्र कालरा, प्रतापनगर