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उदयपुर : टिकट बंटते ही कांग्रेस में बजा बगावत का बिगुल, रातभर रूठों को मनाते रहे प्रत्याशी

कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची जारी होते ही उदयपुर नगर निगम चुनाव में कई वार्डों में टिकट को लेकर दावेदारों और कार्यकर्ताओं का विरोध सामने आया। असंतोष को थामने के लिए अधिकृत प्रत्याशी और समर्थक रातभर रूठों को मनाते रहे, अब सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन बगावत की तस्वीर साफ होगी।
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उदयपुर. नगर निगम चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची जारी होते ही पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया। टिकट वितरण के बाद कई वार्डों में दावेदारों और उनके समर्थकों ने विरोध का मोर्चा खोल दिया। कहीं दूसरे वार्ड से प्रत्याशी उतारने को लेकर पैराशूट उम्मीदवार का आरोप लगा तो कहीं सामान्य सीट पर ओबीसी या महिला प्रत्याशी को टिकट देने पर नाराजगी जताई गई। कुछ वार्डों में स्थानीय कार्यकर्ताओं ने यह तक कहा कि टिकट पाने वाले प्रत्याशी को क्षेत्र के लोग ठीक से पहचानते तक नहीं। उधर, विरोध बढ़ने के साथ ही टिकट पाने वाले कई प्रत्याशी और उनके समर्थक रविवार रातभर रूठे दावेदारों और कार्यकर्ताओं को मनाने में जुटे रहे। अब सोमवार को तस्वीर साफ होगी कि कितने असंतुष्ट मानते हैं और कितने बागी बनकर मैदान में उतरते हैं।

पैराशूट उम्मीदवारों का कई जगह विरोध

कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के अनुसार वार्ड-9 में हर्ष पंवार को टिकट मिलने पर राजेश लोहार और रवि नलवाया की ओर से विरोध जताया गया। वार्ड-12 में यशवंत जोशी को टिकट मिला, जबकि मुजफ्फर हुसैन भी दावेदार थे। वार्ड-14 में सिद्धार्थ सोनी के टिकट पर विजय शंकर कुमावत की दावेदारी के कारण नाराजगी सामने आई। वार्ड-21 में राहुल माली को प्रत्याशी बनाए जाने पर स्थानीय कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र में कम परिचित होने का दावा किया। यहां नारायण माली और दिनेश माली ने भी टिकट मांगा था। वार्ड-22 में हिदातुल्लाह खां को टिकट देने पर भी विरोध की बात सामने आई। कार्यकर्ताओं के मुताबिक उमर फारुख और नजमा मेवाफरोश ने दावेदारी की थी। हिदातुल्लाह के दूसरे वार्ड से होने को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए गए। वार्ड-39 में अनिल जोशी को बाहरी बताते हुए विरोध की बात कही जा रही है। वहां चन्द्रशेखर सांखला और भूपेश चौबीसा ने टिकट मांगा था। वहीं वार्ड-51 में गजेन्द्र सिंह शक्तावत के टिकट पर स्थानीय होने को लेकर सवाल उठाए गए। आयुष अरोड़ा, दीपक चौधरी, दीपक जलानिया और राहुल व्यास ने भी दावेदारी की थी।

सामान्य सीट पर टिकट को लेकर भी नाराजगी

कांग्रेस के भीतर कुछ वार्डों में प्रत्याशी चयन के सामाजिक और आरक्षण समीकरण को लेकर भी असंतोष सामने आया है। वार्ड-46 सामान्य सीट होने के बावजूद कुलदीप माली को टिकट दिए जाने पर विरोध की बात कही गई है। यहां कमलेश कुमार, दीपक मेनारिया और राजेश मेनारिया दावेदार थे। वार्ड-78 में रमेश डांगी को टिकट मिलने पर भी सामान्य सीट पर ओबीसी प्रत्याशी उतारने को लेकर आपत्ति जताई गई। यहां ललित चौर्डिया ने टिकट मांगा था। वार्ड-56 सामान्य सीट पर प्रियंका गर्ग को टिकट दिए जाने को लेकर भी दावेदारों में नाराजगी है। यहां लक्ष्मण सिंह, विकास गौड़ और राकेश जैन ने दावेदारी की थी।

पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप

वार्ड-20 में साजिद खां को टिकट मिलने के बाद वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं के विरोध की बात सामने आई। वार्ड-11 में धर्मेश प्रजापत को टिकट देने पर हरीश धाबाई और जगदीश पुरी के विरोध की जानकारी पार्टी नेताओं ने दी। वार्ड-30 में कृष्णा सालवी के टिकट पर विजय सालवी की ओर से विरोध जताया जा रहा है। वार्ड-31 में हीना कौशर बानो को टिकट मिलने पर रूबिना बानो की दावेदारी के कारण नाराजगी सामने आई। वार्ड-43 में राजकुमार गमेती के टिकट पर शंकर गमेती के विरोध की बात कही गई है। वार्ड-54 में अमित श्रीवास्तव को टिकट मिलने पर दिनेश माली की नाराजगी बताई गई। वार्ड-59 में विनियासालवी को टिकट मिलने के बाद ललिता खोखावत, नीरू अठवाल, प्रिया, यशोदा वर्मा और मीना कुमारी की दावेदारी के कारण विरोध की बात सामने आई। वार्ड-64 में जोगिंदर सिंह को टिकट मिलने पर पुराने कार्यकर्ता नंदकिशोर व्यास के विरोध की जानकारी सामने आई। वार्ड-70 में पूर्व पार्षद शिप्रा उपाध्याय को टिकट मिलने पर नौसाद दीवान, ताहिर खां, सुब्हान अली, ऋषभ जैन और विदुशेखर त्रिवेदी की दावेदारी के कारण असंतोष बताया गया। वार्ड-80 में योगेश पुष्करना के टिकट पर भी विरोध की बात सामने आई। यहां सौरभ शर्मा सहित पांच स्थानीय लोगों ने टिकट मांगा था। वार्ड-15 में भी टिकट को लेकर असंतोष बताया गया है।

रातभर चली मान-मनुहार

टिकट वितरण के बाद नाराजगी सामने आते ही कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने असंतुष्ट दावेदारों से संपर्क साधना शुरू कर दिया। कई प्रत्याशी रविवार रात अपने-अपने वार्डों में सक्रिय रहे और रूठे कार्यकर्ताओं को मनाने के प्रयास करते रहे। कहीं व्यक्तिगत मुलाकात हुई तो कहीं फोन पर बातचीत कर साथ रहने की अपील की गई। पार्टी के लिए सोमवार का दिन अहम है, क्योंकि नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश है कि टिकट के दावेदार निर्दलीय के रूप में मैदान में नहीं उतरें। पार्टी नेताओं को डर है कि बागी प्रत्याशी कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार के वोटों में सेंध लगा सकते हैं।