आरएनटी मेडिकल कॉलेज के अधीन सेवारत फार्मासिस्ट सक्रिय, ड्यूटी ऑवर्स में बहिष्कार से प्रभावित रोगियों की लगी कतार
डॉ. सुशीलसिंह चौहान/ उदयपुर. सरकार विरोधी कार्मिकों के प्रदेश भर में जारी आंदोलनों के बीच सोमवार को आरपीएसएसएम राजस्थान फार्मासिस्ट सयुंक्त संघर्ष मोर्चा ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। तय रणनीति के तहत मोर्चा से जुड़े आरएनटी मेडिकल कॉलेज के अधीन सेवारत फार्मासिस्ट ने सुबह दो घंटे के लिए कार्य बहिष्कार किया। इस अवधि में मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा काउंटर्स के बाहर बैठे फार्मासिस्ट ने काउंटर पर कतार में खड़े मरीजों को दवा देने से इनकार किया। समस्या से बीमार मरीजों को घंटों तक कतार में बारी का इंतजार करना पड़ा।
कार्य बहिष्कार आगामी 3 अक्टूबर तक जारी रहेगा। गौरतलब है कि मोर्चा की ओर से फार्मासिस्ट हितों की मांग को लेकर गत 29 सितम्बर को काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया गया था। वहीं 30 सितम्बर को प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत अभियान के तहत कायों को अंजाम दिया गया था। संगठन का आरोप है कि बीते 6 साल से फार्मासिस्ट उनकी जायज मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। बावजूद इसके प्रशासनिक स्तर पर उनकी समस्याओं को लेकर कोई सुनवाई नहीं की गई।
मरीजों की मुसीबत
सुबह ड्यूटी ऑवर्स में दो घंटे के कार्य बहिष्कार के दौरान महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के डीडीसी काउंटर पर मरीजों की भीड़ दवा लेने के लिए कतार में खड़ी रही। लेकिन सामूहिक बहिष्कार के बीच लोगों को दवाई नहीं मिल सकी। खास तौर पर गंभीर रोगियों एवं वरिष्ठजनों को कतार में दवा के लिए खड़ा रहना पड़ा। मरीजों की समस्या को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कोई खास सुधार नहीं किए गए।
पहले किया सूचित
इधर, मरीजों की समस्या को लेकर मोर्चा पदाधिकारियों ने बताया कि उनकी ओर से मांगों को लेकर पहले ही सरकार, चिकित्सालय प्रशास व महाविद्यालय प्रशासन को अवगत कराया जा चुका था। प्रत्येक गतिविधि की जानकारी के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर उनकी समस्याओं को लेकर जवाब नहीं मिला। इसके बाद तय रणनीति के तहत उन्होंने कार्य बहिष्कार करने का निर्णय लिया।
डॉ. मधुबाला बनीं जनाना चिकित्सालय अधीक्षक
संभाग के सबसे बड़े पन्नाधाय महिला राजकीय चिकित्सालय की अधीक्षक अब डॉ. मधुबाला चौहान होंगी। प्रशासनिक आदेश की पालना में उन्होंने सेामवार को पद्भार संभाला। इससे पहले चिकित्सा शिक्षा विभाग के नियमों की पालना में पूर्व अधीक्षक डॉ. सुनीता माहेश्वरी ने पद से सेवानिवृत्ति ली। इसके बाद रवींद्रनाथ टैगोर राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. डीपी सिंह ने डॉ. मधुबाला को अधीक्षक पद की जिम्मेदारी सौंपी। गौरतलब है कि राजकीय नियमों के तहत आयुर्विज्ञान महाविद्यालय के प्राध्यापकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष की गई, जबकि प्रशासनिक पदों के लिए सेवानिवृत्ति आयु केवल 62 वर्ष सुनिश्चित है।