
प्रदेश में निशुल्क दवा केन्द्रों पर मरीजों को दवाई देकर राहत देने वाले फार्मासिस्ट को जल्द ही ÒसंजीवनीÓ मिलने वाली है। यानी राजकीय सेवा में उनका अलग से केडर बनने वाला है। हालांकि इसमें देरी को लेकर फार्मासिस्ट सरकार को बार-बार चेता रहे हैं। मुख्यमंत्री ने दो वर्ष पूर्व इसकी घोषणा की थी, इसमें पहला कदम बढ़ाते हुए अब डीपीसी की सूची जारी की गई है, इसके साथ ही नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। फार्मासिस्ट का अलग से केडर नहीं होने से इन कार्मिकों को कई परिलाभ नहीं मिल रहे हैं।
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हड़ताल की दी चेतावनी तो सरकार ने बढ़ाया कदम
राज्य में कार्यरत फार्मासिस्ट ने गत दिनों सरकार को पत्र लिखकर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी थी, ऐसे में सरकार ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए डीपीसी की प्रक्रिया शुरू कर एक सूची जारी की।
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दो वर्ष पहले सीएम ने की थी घोषणादो वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2 फरवरी 2021 को इसकी घोषणा की थी। लेकिन इस प्रक्रिया में काफी देरी हो गई। घोषणा में उल्लेख था कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट के कुल 4080 पद स्वीकृत हैं। तीन स्तर पर पदोन्नति के लिए 858 पदों का अपग्रेडेशन किया जाएगा। उच्चतम स्तर पर एक पद उपनिदेशक फार्मासिस्ट और उसके नीचे अधीक्षक फार्मासिस्ट के 40 पद होंगे। वरिष्ठ फार्मासिस्ट के 817 पद क्रमोन्नत किए जाएंगे।
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सूची में कई त्रुटियां
सरकार ने राज्य के करीब 817 फार्मासिस्ट की सूची मई में जारी की, लेकिन इसमें कई कमियां है। सूची दो बार जारी की गई है।- जो पदोन्नत होकर डीसीओ हो गए उनके भी नाम जोडे़ गए हैं।
- जो नौकरी छोड़ गए उनके भी नाम शामिल किए गए हैं।- जो अन्य नौकरी में चले गए इस सूची में इनके भी नाम दर्ज हैं।
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2708 लोगों को भर्ती के लिए शुरू की प्रक्रिया
मई में फार्मासिस्ट भर्ती निकाली गई थी, जिसे निरस्त कर एक बार फिर से भर्ती निकाली गई, जिसमें आवेदन करने की अंतिम तिथि 4 जून रखी गई है। प्रदेश में कुल 2708 फार्मासिस्ट की भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
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हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द डीपीसी हो और अलग से केडर बन जाए ताकि सभी को इसका लाभ मिले, जो नई भर्ती निकाली है, उसकी प्रक्रिया जल्द पूरी हो। सरकार ने जो सूची जारी की है उसे सही किया जाए।
विजेन्द्र सिंह राठौड़, जिलाध्यक्ष उदयपुर फार्मासिस्ट कर्मचारी संघ