
पंकज वैष्णव
Udaipur: प्रदेश में जमीनों पर गिद्ध नजरें रखने वाले माफिया और दंबग लोगों ने भगवान की जमीनों को भी नहीं छोड़ा। बड़ी बात ये कि भगवान की जमीन पर जमे दबंग कब्जा खाली करने को तैयार नहीं। सरकारी मंदिरों की संपत्तियों की देखरेख करने वाले देवस्थान के अफसर भी लाचार है। वे विभागीय भूमि से कब्जे खाली नहीं करवा पा रहे हैं।
प्रदेश और प्रदेश से बाहर देवस्थान विभाग के अधीन मंदिरों के नाम की संपत्तियों पर कब्जे लगातार हो रहे हैं और सरकार संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त नहीं करवा पा रही है। सालों से अतिक्रमण कर जमे लोगों से विभाग ने तीन साल के दरमियान कार्रवाई के काफी प्रयास किए, लेकिन महज 2 प्रतिशत अतिक्रमियों को ही बेदखल कर पाए हैं।
देव भूमियों पर अतिक्रमण- 1804
अब तक हटाए गए अतिक्रमण- 44
तहसीलदार के स्तर पर विचाराधीन- 124
न्यायालय में विचाराधीन मामले- 121
शेष अतिक्रमित विभागीय भूमि- 1760
देवस्थान विभाग की 2759.2314 हेक्टेयर जमीनों पर अतिक्रमण रहे हैं। उसमें से महज 7.4406 हेक्टेयर को ही अतिक्रमण से मुक्त करा पाए हैं। जबकि, 2751.7908 हेक्टेयर जमीनें अब भी अतिक्रमित है। 553.4392 हेक्टेयर जमीनों के मामले तहसीलदार के स्तर पर चल रहे हैं, वहीं 695.233 हेक्टेयर जमीनों के मामले कोर्ट में विचाराधीन है।
| ढाई सौ संपत्तियों के कोर्ट में दावे | तहसीलदार स्तर पर | अन्य न्यायालयों में प्रकरण |
| जयपुर | 06 | 02 |
| कोटा | 96 | 75 |
| उदयपुर | 17 | 18 |
| ऋषभदेव | 00 | 06 |
| बीकानेर | 02 | 01 |
| जोधपुर | 01 | 05 |
| भरतपुर | 02 | 06 |
| वृंदावन | 00 | 08 |
देवस्थान विभाग आयुक्त वासुदेव मालावत ने बतया कि विभाग के पास अपनी अतिक्रमण रोधी टीम नहीं है। समय-समय पर शिकायतों के आधार पर जिला प्रशासन की मदद लेकर कार्रवाई की जाती है। कई मामलों में न्यायिक प्रक्रिया विचाराधीन चल रही है।
| जिला | अतिक्रमण की स्थिति |
| दौसा | 71 |
| अलवर | 283 |
| झुंझुनूं | 232 |
| भीलवाड़ा | 48 |
| अजमेर | 37 |
| शाहपुरा | 23 |
| केकड़ी | 164 |
| कोटा | 20 |
| बूंदी | 85 |
| बारां | 64 |
| झालावाड़ | 02 |
| उदयपुर | 389 |
| राजसमंद | 54 |
| चित्तौडग़ढ़ | 128 |
| प्रतापगढ़ | 110 |
| गंगापुर सिटी | 36 |
| बांसवाड़ा | 01 |
| डूंगरपुर | 01 |
| बीकानेर | 01 |
| चुरू | 03 |
| करोली | 23 |
| धौलपुर | 03 |