उदयपुर

Exclusive : मेवाड़ सहित 35 रियासतों की गाथा दर्शाते सिक्के… 2300 साल पुराने सिक्कों का संकलन है औंकारलाल के पास

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Oct 24, 2018
coin collection
Exclusive : मेवाड़ सहित 35 रियासतों की गाथा दर्शाते सिक्के... 2300 साल पुराने सिक्कों का संकलन है औंकारलाल के पास

उमेश मेनारिया/ मेनार . ये हैं वल्लभनगर तहसील के बामनिया निवासी औंकारलाल पालीवाल। अमूमन डाक टिकट, नोट-सिक्कों सहित अद्भुत चीजों का संकलन शहरों में ही देखा जाता है, लेकिन गांव में रहते हुए भी औंकारलाल ने डाक टिकट और सिक्कों का अद्भुत संकलन किया है। इनके संकलन में मेवाड़, मारवाड़ सहित 35 रियासतों के सिक्के हैं।
पालीवाल ने बताया सिक्कों का संग्रह विभिन्न स्थानों पर घूम-घूमकर रिश्तेदारों, परिचितों आदि से हासिल किए हैं। अन्य संग्रहकर्ताओं से भी दुर्लभ सिक्के प्राप्त किए। पालीवाल के पास पुराने डाक टिकट, नोट और प्रसिद्ध कलाकारों की पुरानी पेंटिंग का भी संग्रह है। लंदन में छपे विशेष कार्ड, खामी वाले नोट, खामी वाले सिक्के सहित कई अद्भुत चीजों का संग्रह है।


इन रियासतों के सिक्के

संग्रह में धार, झाबुआ, दाहोद, छोटा उदयपुर, सैलाना, इंदौर, जयपुर, देवास, ग्वालियर, रतलाम, भोपाल, बड़ौदा, कुचबिहार, बांसवाड़ा, अहमदनगर, मैसूर, अलवर, बीकानेर, बूंदी, जावरा, किशनगढ़, मेवाड़, टोंक, सीतामऊ, उज्जैन, कोटा, जोधपुर, इचपुर, सलूम्बर, भीण्डर, चित्तौडगढ़़ समेत 35 रियासतों के सिक्कों का संग्रह है। रानी विक्टोरिया, पंचम जॉर्ज, सिक्स जॉर्ज, एडवर्ड, शाह आलम, मुगल काल सहित 2000 साल पुराने छत्रप राज्य का सिक्का भी शामिल है। परमारकालीन गढ़ैया सिक्के भी संग्रह में है।

ब्रिटिश काल के सभी सिक्के
औंकारलाल के पास ब्रिटिश काल में बने उन सिक्कों का संग्रह है, जो समय-समय पर बदलते रहे। इनमें 1862 का रानी विक्टोरिया क्वीन ब्रिटेन के सिक्के से लेकर 1945 में आए जार्ज षष्ठम के काल में जारी हुआ सिक्का भी है।


स्थानीय रियासतों के सिक्के

त्रिशूलिया, ढ़ीगला तथा भीलाड़ी तांबे के सिक्के भी प्रचलित हुए। 1805-1870 के बीच सलूम्बर जागीर से पद्मशाही ढ़ीगला सिक्का चलाया गया, वहीं भीण्डर जागीर में तत्कालीन महाराजा जोरावरसिंह ने भीण्डरिया सिक्का चलाया। इनकी मान्यता जागीर लेन-देन तक ही सीमित थी। मराठा अतिक्रमण काल के मेहता प्रधान ने मेहताशाही मुद्रा चलाई, जो काफी सीमित संख्या में है। मेवाड़ में सोने, चांदी और तांबे के सिक्क प्रचलित रहे। ये सभी सिक्के भी संग्रह में है।

10वीं उत्तीर्ण करने का जुनून
सिक्का संग्रहकर्ता पालीवाल कामकाज के चलते 10वीं उत्तीर्ण नहीं कर पाए। इसके लिए इन्होंने 16 बार परीक्षा दी, फिर भी सफलता नहीं मिली। इन्होंने अपने जुनून को कम नहीं होने दिया। वे 68 वर्ष की उम्र में भी फिर 10वीं की परीक्षा देने की इच्छा रखते हैं।


‘सत्यकथा’ ने दिखाई राह

पालीवाल ने बताया कि उन्हें सिक्के संग्रह करने का शौक 1975 में लगा, जब वे 25 वर्ष के थे। जब इन्होंने ‘सत्यकथा’ नामक पुस्तक में कुछ प्राचीन सिक्के हजारों रुपए में बिकने की कथा पढ़ी। इस कथा में डाक टिकट और पेंटिंग संग्रह का भी जिक्र था। इसके साथ ही शुरु हुआ जुनून अब भी कायम है।

Updated on:
24 Oct 2018 03:55 pm
Published on:
24 Oct 2018 03:39 pm