उदयपुर

पेट्रोल-डीजल संकट गहराया, डीलर्स ने दी हड़ताल की चेतावनी

राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की सीमित आपूर्ति से आमजन और किसानों की परेशानी बढ़ गई है। पेट्रोल पंप डीलर्स ने तेल कंपनियों पर अनौपचारिक लिमिट लगाने का आरोप लगाते हुए 1 जून से हड़ताल की चेतावनी दी है। डीलर्स ने वैट कम करने और किसानों को ड्रम में डीजल देने की अनुमति देने की मांग भी उठाई है।

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May 27, 2026
उदयपुर. शहर के एक पंप पर ईंधन भराने के लिए लगी वाहनों की कतार। पत्रिका

उदयपुर. जिले में पेट्रोल-डीजल को लेकर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। एक ओर पेट्रोल पंपों पर सीमित आपूर्ति से आमजन घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर पेट्रोल पंप संचालक भी तेल कंपनियों और सरकारी विभागों के दबाव से परेशान हैं। अब राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार के उच्च अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो 1 जून से प्रदेशभर के पेट्रोल पंप डीलर्स धरना-प्रदर्शन और हड़ताल पर उतरेंगे।

डीलर्स का आरोप है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पर तेल कंपनियों ने अनौपचारिक लिमिट लगा दी है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों के अधिकारियों की ओर से मौखिक आदेश, व्हाट्सएप संदेश और फोन कॉल के जरिए एक वाहन को सीमित मात्रा में ही ईंधन देने के निर्देश दिए हैं। डीलर्स के अनुसार कहीं 50 लीटर तो कहीं 200 लीटर तक की सीमा तय कर दी है। यदि कोई डीलर तय मात्रा से अधिक ईंधन देता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई कर बिक्री बंद करने और कारण बताओ नोटिस जारी करने तक की नौबत आ रही है।

पेट्रोल पंपों पर बढ़ रही भीड़, आमजन में गुस्सा

आपूर्ति सीमित होने से पेट्रोल पंपों पर कतारें लग रही हैं। कई जगह उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच विवाद की स्थिति भी बन रही है। लोग यह समझ नहीं पा रहे कि आखिर एक जगह पूरी टंकी भर रही है तो दूसरी जगह सीमित ईंधन क्यों दिया जा रहा है। डीलर्स का कहना है कि कंपनियां सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार नहीं कर रही कि सप्लाई सीमित की गई है, जबकि उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इससे जनता का गुस्सा सीधे पेट्रोल पंप संचालकों पर निकल रहा है।

किसानों की चिंता बढ़ी, ड्रम में डीजल देने पर रोक

सबसे बड़ी चिंता किसानों को लेकर जताई है। डीलर्स का कहना है कि तेल कंपनियों ने ड्रमों में डीजल देने पर रोक लगा दी है। ऐसे में खेती-किसानी में उपयोग होने वाले जनरेटर, इंजन और कृषि उपकरणों के लिए डीजल उपलब्ध कराना मुश्किल हो गया। बारिश और बुवाई का समय नजदीक आने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

डीलर्स को चोर की तरह पेश किया जा रहा

राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने विधिक माप विज्ञान विभाग पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। डीलर्स का कहना है कि मामूली तकनीकी त्रुटियों को शॉर्ट डिलीवरी बताकर सूचनाएं ऐसे प्रकाशित करवाई जा रही है जैसे पेट्रोल पंप संचालक जानबूझकर चोरी कर रहे हो। डीलर्स का तर्क है कि मशीनों का निर्माण, फिटिंग और तकनीकी नियंत्रण तेल कंपनियों के हाथ में होता है। ऐसे में मशीनों में तकनीकी त्रुटि होने पर केवल डीलर को दोषी ठहराना गलत है।

राजस्थान में सबसे महंगा पेट्रोल-डीजल

एसोसिएशन ने राज्य में ऊंचे वैट को भी बड़ा मुद्दा बताया है। उनका दावा है कि राजस्थान में पेट्रोल-डीजल पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा और गुजरात की तुलना में काफी महंगा है। इससे वाहन चालकों, परिवहन व्यवसाय और आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। डीलर्स ने मांग की है कि राज्य सरकार कम से कम 5 प्रतिशत वैट कम करे ताकि आमजन को राहत मिल सके और बिक्री भी बढ़े।

डीलर्स की प्रमुख मांगें

पेट्रोल-डीजल आपूर्ति पर लगी अनौपचारिक सीमा हटाई जाए- सभी तेल कंपनियों के साथ सरकार तत्काल बैठक करे- किसानों को ड्रम में डीजल देने की स्पष्ट अनुमति मिले

- पेट्रोल पंप मशीनों में फ्लो मीटर और पारदर्शी व्यवस्था लागू हो- राजस्थान में पेट्रोल-डीजल पर वैट कम किया जाए

- रैलियों और सरकारी कार्यक्रमों में उधार दिए ईंधन का भुगतान समय पर हो

Published on:
27 May 2026 06:28 pm
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