
Rajasthan Transporters End Strike (Patrika Photo)
Rajasthan Transporters End Strike: उदयपुर: वीएलटीडी जीपीएस, वाहन फिटनेस सेंटर और परमिट संबंधी समस्याओं को लेकर प्रदेशभर में चल रहा ट्रांसपोर्टरों का अनिश्चितकालीन चक्का जाम आखिरकार समाप्त हो गया है। सरकार द्वारा ट्रांसपोर्टरों की कुछ प्रमुख मांगों को स्वीकार करने तथा शेष मांगों पर आवश्यक सुधार व कार्रवाई के लिए समय मांगने के बाद, राजस्थान संघर्ष समिति ने सर्वसम्मति से हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी। इस निर्णय के साथ ही उदयपुर जिले के 2 हजार से अधिक ट्रकों के पहिए गुरुवार से फिर सड़कों पर दौड़ेंगे और माल परिवहन व्यवस्था पूरी तरह सामान्य होने लगेगी।
इससे पहले बुधवार को यह आंदोलन अपने चरम पर था। उदयपुर ट्रांसपोर्ट नगर से आरटीओ कार्यालय तक करीब 50 ट्रकों की एक रैली निकाली गई, जिसमें ट्रक मालिक, ट्रांसपोर्ट व्यवसायी और चालक बड़ी संख्या में शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि जब तक सरकार लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक चक्का जाम जारी रहेगा।
उदयपुर ट्रांसपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के प्रवक्ता हेमेंद्र सिंह दवाणा ने बताया कि संरक्षक पुष्पराज मेहता के निर्देशन और अध्यक्ष नरेंद्र सिंह राणावत के नेतृत्व में आंदोलन को सफल बनाने के लिए शहर व औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया गया। इस दौरान उदयपुर चेंबर ऑफ कॉमर्स, मार्बल मंडी, कृषि उपज मंडी, सब्जी मंडी, लघु उद्योग भारती और कलड़वास चेंबर सहित विभिन्न व्यापारिक संगठनों का भरपूर समर्थन मिला।
आंदोलन के दौरान संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने आरटीओ एवं जिला परिवहन अधिकारी से गहन वार्ता की। अधिकारियों ने परिवहन आयुक्त से चर्चा करने के बाद ट्रांसपोर्टरों को आश्वस्त किया कि वीएलटीडी जीपीएस लगाने की प्रक्रिया जल्द शुरू कराई जाएगी। लंबित फिटनेस एवं परमिट संबंधी कार्यों को शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा। फिटनेस सेंटर बंद रहने की अवधि के दौरान काटे गए चालानों की समीक्षा कर पात्र वाहन मालिकों को राहत दी जाएगी। इस ठोस भरोसे के बाद ही सरकार और संघर्ष समिति के बीच सहमति बन सकी।
राजस्थान संघर्ष समिति ने कहा कि सरकार ने उनकी कुछ प्रमुख मांगों को तुरंत स्वीकार कर लिया है, जबकि अन्य मांगों पर सुधार के लिए समय मांगा है। इसे देखते हुए सर्वसम्मति से हड़ताल वापस ले ली गई है और सभी ट्रांसपोर्टरों से गुरुवार से काम पर लौटने का आह्वान किया गया है।
समिति ने आंदोलन को सफल बनाने वाले सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस आंदोलन ने साबित कर दिया है कि जब ट्रांसपोर्ट उद्योग एकजुट होकर अपनी बात रखता है, तो सरकार को उसकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना ही पड़ता है। हालांकि, समिति ने यह भी साफ किया है कि लंबित मांगों पर सरकार की कार्रवाई पर पैनी नजर रखी जाएगी और यदि तय समय में समाधान नहीं हुआ, तो भविष्य में फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।
Updated on:
15 Jul 2026 09:27 pm
Published on:
15 Jul 2026 09:27 pm
