उदयपुर

वन भूमि अधिग्रहण पर सियासत तेज: कांग्रेस के बाद अब भाजपा विधायक रावत भी मैदान में

Aug 08, 2026
Rajasthan

Bजिला कलक्टर से मुलाकात कर छापली, खीमाखेड़ा व पीपली की 864 हेक्टेयर प्रस्तावित भूमि पर पुनर्विचार की मांग, ग्रामीण हितों का दिया हवालाB
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Bराजसमंद. Bभीम क्षेत्र में प्रस्तावित वन भूमि अधिग्रहण का मामला अब राजनीतिक रंग पकड़ने लगा है। पहले कांग्रेस के विरोध के बाद अब सत्ताधारी दल के भीम-देवगढ़ विधायक हरिसिंह रावत भी खुलकर मैदान में उतर आए हैं। विधायक ने गुरुवार शाम जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा से मुलाकात कर छापली, खीमाखेड़ा एवं पीपली ग्राम पंचायतों में प्रस्तावित वन भूमि अधिग्रहण पर पुनर्विचार की मांग उठाई। विधायक रावत ने जिला कलक्टर को बताया कि प्रस्तावित न्यूक्लियर परियोजना के लिए करीब 800 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित किए जाने का प्रस्ताव है। इस भूमि से बड़ी संख्या में ग्रामीणों की आजीविका, कृषि और अन्य आर्थिक गतिविधियां जुड़ी हुई हैं। ऐसे में भूमि अधिग्रहण से हजारों लोगों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने जनभावनाओं और प्रभावित परिवारों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने तथा आवश्यक कार्रवाई कराने का आग्रह किया। जिला कलक्टर ने विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दे का नियमानुसार परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
Bजमीन अडाणी के नाम गिरवी रखने का लगााया था आरोपB
उल्लेखनीय है कि इससे पहले इसी मुद्दे पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष आदित्य प्रतापसिंह, पूर्व विधायक हरिसिंह रावत तथा प्रभावित तीनों पंचायतों के ग्रामीण भी जिला कलक्टर से मिल चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि अडाणी को जमीन के बदले जमीन देने की प्रक्रिया के तहत छापली, खीमाखेड़ा और पीपली की 864 हेक्टेयर भूमि वन विभाग को सौंपी जा रही है। कांग्रेस ने 15 दिन में समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी देने के साथ ही इस मुद्दे पर सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए थे।
अब भाजपा विधायक के भी खुलकर विरोध दर्ज कराने से यह मामला केवल भूमि अधिग्रहण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भीम क्षेत्र की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है।

Updated on:
08 Aug 2026 06:00 am
Published on:
08 Aug 2026 06:00 am