उदयपुर

प्रवासी भारतीय दिवस विशेष : धरती सुनहरी, अंबर नीला…हर मौसम रंगीला..ऐसा देश है मेरा

- एनआरआईज भुलाए नहीं भूलते अपने देश का प्यार और स्वाद
3 min read
Jan 09, 2019
Feature image

मधुलिका सिंह/उदयपुर. धरती सुनहरी, अंबर नीला...हर मौसम रंगीला..ऐस देश है मेरा... देश की मिट्टी की सौंधी खुशबू और वतन का प्यार कुछ ऐसा होता है कि लोग दुनिया के किसी भी कोने में रहें, उन्हें ये भुलाए नहीं भूलती हैं। ये एक ऐसी डोर होती है जो विदेश में रहने वाले भारतीयों को अपने वतन से बांधे रखती है। देश के कई लोग अपने सपनों को पूरा करने के लिए अच्छे पैकेज, ज्यादा तरक्की आदि के लिए विदेशों में जाकर बस जाते हैं। लेकिन अपने देश की यादें उन्हें परदेस में भी अपनों से जुड़े होने का अहसास हर वक्त कराती हैं। शहर के कुछ लोग ऐसे हैं जो विदेशों में रहते हैं तो कई लोग ऐसे हैं जो विदेशों में रहकर फिर से स्वदेश लौट आए हैं। प्रवासी भारतीय दिवस के अवसर पर हम कुछ ऐसे ही लोगों से मिलवा रहे हैं-

देशी खाने और त्योहारों को करते हैं मिस
नम्रता सांचीहर ने बताया कि वह 13 साल से कैलिफोर्निया रह रही हैं। उनके पति चंद्रकुमार वहां स्थित श्रीनाथजी मंदिर के मुखिया हैं। वे बताती हैं, अपने देश की याद उन्हें हमेशा आती है। सबसे ज्यादा वे देश के खाने और यहां भारतीय त्योहारों को मिस करती हैं। जब भी कोई भारतीय त्योहार आता है तो वे उसे सेलिब्रेट तो करते हैं लेकिन जिस अंदाज में भारत में त्योहार मनाते हैं, उस अंदाज से वे नहीं मना पाते हैं। वे कहती हैं, बार-बार इंडिया आना तो नहीं होता लेकिन जब वे आते हैं तो वो हर पल उनके लिए यादगार हो जाता है। वे भारत से ढेर सारी यादें अपने साथ ले जाते हैं।

अब विदेशों में प्रचार कर रहे संस्कृति
दिग्विजयसिंह राठौड़ सिविल इंजीनियरिंग करने के बाद दुबई जॉब करने चले गए। कुछ साल तक वहां काम करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि उनके देश को उनकी जरूरत है और वे स्वदेश लौट आए। दोस्त शुभम कोठारी के साथ बिजनेस शुरू किया। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स की विदेशों में काफी डिमांड है। वे मोलेला, मार्बल, वुड कार्विंग के आयटम्स को यूनिक आइडिया से डिजाइन कर तैयार करवाते हैं। इस बिजनेस को अब दो साल हो चुके हैं। वे अब कई लोगों को रोजगार भी दे चुके हैं। उनके प्रोडक्ट्स दुबई के अलावा टूयूनीशिया व मोरक्को भेजे जा रहे हैं।



परदेस में कल्चर की कमी
10 सालों से दुबई में रह रहीं छाया अपने देश की हर बात को मिस करती हैं। उनके हसबैंड दीपक कुमार चंदवानी का टेक्सटाइल बिजनेस है। उन्होंने बताया कि वहां सब कुछ अच्छा है लेकिन बच्चों को इंडियन कल्चर नहीं सिखा पाते। अपने जो फेस्टिवल्स हैं, उन्हें प्रेक्टिकली नहीं दिखा पाते हैं। जब इंडिया आते हैं तब उन्हें सब कुछ बताते हैं। यहां कोई सोशल सर्कल भी नहीं बना पाते। सभी लोग अपनी-अपनी लाइफ में बहुत बिजी होते हैं जबकि इंडिया में सब लोग घुलमिलकर रहते हैं। सबसे ज्यादा मुझे अपने कल्चर की कमी खलती है।

बहुत खलती है इंडियन खाने की कमी
12 साल से सैन फ्रांसिस्को में रह रहे योगेश्वर सेल्स फोर्स में इंजीनियरिंग डायरेक्टर हैं। वे कहते हैं, मेरे देश की जब बात आती है तो मैं थोड़ा सा इमोशनल हो जाता हूं। मैं बहुत फूडी हूं तो इंडिया के खाने की बहुत कमी यहां खलती है। इसके अलावा जो फेस्टिवल्स की धूम-धड़ाका इंडिया में होता है, वैसा यहां नहीं होता। यहां हम इंडियन कम्यूनिटी के साथ सेलिब्रेट करते हैं लेकिन वैसा धमाल नहीं होता। इसी तरह मैं और मेरी पत्नी धरा की कोशिश रहती है कि हमारे बच्चों को इंडियन कल्चर, फैमिली, सोसायटी, रिलेटिव्स के बारे में सब कुछ पता हो। उन्हें जब इंडिया साथ लाते हैं तो सब कुछ बताते और सिखाते हैं। इसके अलावा हम अपने शहर के जरूरतमंद बच्चों की मदद करने की कोशिश करते हैं। उनकी पढ़ाई और दूसरी जो आवश्यकताएं वे पूरी कर पाएं ये कोशिश रहती है।


परदेस में भी प्यारी, स्वदेशी मिठाई हमारी
उदयपुर. बेसन की चक्की, घेवर, फीणी, गुजिया जैसी मिठाइयों का नाम लेते ही हर भारतीय के मुंह में पानी आ जाता है भले ही वे विदेश में बैठे हुए हों। देशी मिठाइयों का स्वाद परदेसी भारतीयों को खूब रास आता है। इसी कारण उनकी विशेष डिमांड पर ये मिठाइयां भेजी जाती हैं। शहर के मिठाई विक्रेताओं के अनुसार, विदेश में रहने वाले लोग खुद या रिश्तेदारों के माध्यम से मिठाइयां मंगवाते हैं। साल भर में कई किलो मिठाइयां विदेश पहुंचती हैं। मिठाई विक्रेता आनंद परिहार के अनुसार, सबसे ज्यादा देशी मिठाइयां बेसन की चक्की, घेवर, गुजिया, चंद्रकला और सर्दी में तारफीणी की ज्यादा डिमांड रहती है। इसके अलावा ड्राइ फ्रूट्स की मिठाइयां भी ये सभी देशी घी की मिठाइयां होती हैं और जो ज्यादा दिन तक टिकती हैं। ये कुवैत, साउथ अफ्रीका, आस्ट्रेलिया आदि कई देशों में ले जाई जाती हैं। इसी तरह एनआरआइ शादियों में भी कॉम्बो बनाकर देते हैं। इसके अलावा नमकीन में मूंग दाल कचौड़ी, मिर्ची बड़ा, प्याज की कचौड़ी, सूखी नमकीन, लौंग की सेव व मिक्सचर भी विदेशों में खूब ले जाए जाते हैं।

Updated on:
09 Jan 2019 05:06 pm
Published on:
09 Jan 2019 05:06 pm