
उदयपुर . रेल हादसों को टालने के लिए इलेक्ट्रोनिक सर्किट वाले ट्रेक तैयार करने पर करीब 1 लाख करोड़ रुपयों का खर्च प्रस्तावित है परंतु यदि देशभर की सभी ट्रेनों में हमारे की ओर से विकसित एप और हार्डवेयर लगा दिया जाए तो इस पर मात्र 130 करोड़ रुपया खर्च आएगा।
यह कहना है कि उदयपुर में हो रहे डिजिफेस्ट में आए हुए जयपुर के जेईसीआरसी कॉलेज के भुवनेश प्रतापसिंह व दल का। हेकाथॉन कॉडिंग प्रतियोगिता में अपने साथी गौरांग दाधिच, भावेश सोनी और नमन जैन के साथ कोड अबोड की टीम ट्रेन की पटरियों पर क्रेक खोजने वाला मॉडल तैयार कर रही है।
यह मॉडल रेडियो फ्रिक्वेंसी पर काम करता है और यह पटरियों में आने वाली बाधा या दुर्घटना के अंदेशों को भांपकर ट्रेन को 100 से लगाकर 500 मीटर पहले स्वत: रोक देता है। रेडियो फ्रिक्वेंसी पर आधारित हार्डवेयर को आईओटी एप्लीकेशन से जोडकऱ उस स्थान पर भी काम किया जा सकता है, जहां पर इंटरनेट सुविधा उपलब्ध नहीं होती है।
भामाशाह से जोड़ेगा प्रवासी मित्र
अमित और निरूपमा टेक्जेरिस्ट टीम के जरिए प्रवासी मित्र वेब पोर्टल पर काम कर रहे हैं। यह लोक कलाकारों को प्रोमोट करेगा और उनके बारे में सारी जानकारी उपलब्ध कराएगा। वे ई मित्र और भामाशाह कार्ड के माध्यम से इससे जुड़ सकेंगे। पोर्टल से जुड़े कलाकारों के बारे में जानकारी प्राप्त कर ट्यूरिस्ट उनकी कला का लुत्फ उठा सकेंगे और इसका भुगतान भी भामाशाह प्लेटफॉर्म के जरिए मिल सकेगा।
कर्मचारियों की जवाबदेही तय करेगा एप
जेएमआईटी, यमुनानगर से आए गौरव, मोहित, कुलविंदर और गौरव ऐसा सॉफ्टवेयर बना रहे हैं जो दफ्तरों में सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही तय करेगा। आमजन यह जान पाएगा कि उसके प्रकरण में क्या कार्रवाई की गई है और अभी क्या चल रहा है। किसी भी सरकारी काम के लिए तय समयावधि में काम नहीं होने पर बताएगा कि किसकी लापरवाही के कारण काम अटका। इस सॉफ्टवेयर में विभाग और आमजन के लिए अलग-अलग पासवर्ड, लॉगिन रहेंगे जिससे वे इस पर काम कर सकेंगे।
ट्यूरिस्ट के लिए गाइड बनेगा चैट बोट
जयपुर के विनायक का ‘चैट बोट’ पर्यटकों के लिए परफेक्ट गाइड का काम करेगा। यह चैटिंग का रोबोट है, जो पर्यटकों को हर सवाल का जवाब देगा। चैट बोट में उसके लिखे हर सवाल का जवाब और उससे जुड़े लिंक यूजर को मिल जाएंगे जिससे किसी भी स्थान के बारे में उसकी जिज्ञासाओं का समाधान होगा और पर्यटन स्थलों के बारे में परफेक्ट जानकारी लेकर भ्रमण कर सकेगा। इसी प्रकार नई दिल्ली से आई व्हाइट बटर टीम के सोनल विज, हितेश और शिरीन का एप ‘सिंपली राजस्थान’ पर्यटकों के लिए स्मार्ट असिस्टेंट का काम करेगा। इसके जरिए ट्यूरिस्ट को किसी भी स्थान की सारी जानकारी ऑडियो में मोबाइल पर मिल जाएंगी।