
शारदीय नवरात्रि में हाथी पर सवार होकर आएंगी दुर्गा माता demo pic
उदयपुर. इस आषाढ़ की गुप्त नवरात्र विशिष्ठ योग संयोग से खास होने वाली हैं, क्योंकि बुध बुद्धि, व्यापार और वाणी का कारक है। सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और पुष्य नक्षत्र के दुर्लभ संयोगों का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन शुभ योगों के प्रभाव से भारत का सामरिक, आर्थिक और आध्यात्मिक स्तर ऊंचा उठेगा, जिससे वैश्विक पटल पर देश का मान-सम्मान और गौरव बढ़ेगा।
पंडितों के अनुसार आषाढ़ के गुप्त नवरात्र इस वर्ष बुधवार 15 जुलाई से शुरू हो रहे हैं जो 23 जुलाई तक चलेंगे। इसे शाकम्भरी नवरात्र भी कहते हैं। ये तांत्रिक साधना, नौकरी, कोर्ट-कचहरी, शत्रु बाधा दूर करने के लिए सबसे असरदार मानी क्योंकि इस वर्ष गुरु पुष्य नक्षत्र, सर्वार्थसिद्धि योग, रवि योग भी बन रहे हैं।
"गुप्त" साधना "शुभयोग"= फल
जानकारों ने बताया कि गुप्त नवरात्र में योग का महत्व इसलिए ज्यादा है क्योंकि "गुप्त" साधना "शुभयोग"= फल बहुत जल्दी मिलता है। पंडितों के अनुसार महाविद्या साधना के अन्तर्गत इन 9 दिनों में माँ दुर्गा के 10 महाविद्या रूपों की पूजा होती है। गुप्त रूप से जप-तप किया जाता है, इसलिए इसे गुप्त कहते हैं। बुधवार को प्रतिपदा है, बुध बुद्धि, व्यापार और वाणी का कारक है। इस दिन कलश स्थापना से विद्या, नौकरी और कारोबार में उन्नति का योग बनता है।
कब कब बन रहे नवरात्र में योग-संयोग
16 जुलाई को पुष्य नक्षत्र और गुरुवार का संयोग बन रहा है। इसे "गुरु पुष्य योग" कहते हैं। तंत्र-मंत्र सिद्धि, धन लाभ और गुरु कृपा के लिए ये दिन सबसे श्रेष्ठ है।
19 जुलाई अष्टमी को रविवार है। रवि अष्टमी शुभ नक्षत्र का योग बनने से "सर्वार्थ सिद्धि योग" बनता है। इस दिन किया गया जप, हवन, दान 100 गुना फल देता है। महाविद्या साधना के लिए बेस्ट दिन।
21 जुलाई को रवि योग का संयोग है। शत्रु बाधा, कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय के लिए ये दिन खास है। नवमी गुरुवार को पड़ रही है। गुरुवार को माँ की विदाई और कन्या पूजन करने से गुरु कृपा और संतान सुख मिलता है।
गुप्त नवरात्र में क्या करें श्रद्धालु
श्रद्धालु 15 जुलाई सुबह घटस्थापना के शुभ मुहूर्त में करें। अखंड ज्योति जलाएं। ओम ऐं ह्रीं क्लींचामुण्डायैविच्चे" का 108 बार जप रोज करें। दुर्गा सप्तशती के 1 अध्याय रोज या पूरे 9 दिन में 3 बार पाठ। खीर, हलवा, लाल फल, नारियल का भोग लगाएं। 9 दिन चावल, दूध, सफेद कपड़ा के दान करें। ज्योतिषयों के अनुसार इन 9 दिनों में लहसुन-प्याज, मांस-मदिरा और झूठ से दूर रहना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि एकांत में गुप्त रूप से पूजा करने से फल जल्दी मिलता है।
यह भी होंगे लाभदायक
16 जुलाई गुरु पुष्य पर पीले वस्त्र पहनें। मां बगलामुखी/तारा की पूजा करें। पीली चीज का दान।
19 जुलाई अष्टमी सर्वार्थ सिद्धि हवन, कन्या पूजन, दुर्गा सप्तशती का पाठ जरूर करें। इस दिन की साधना सीधे सिद्ध होती है।
पूरे 9 दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर जप करें। तांबे के लोटे में जल भरकर मां को चढ़ाएं।
गुप्त नवरात्रि क्यों मनाई जाती है?
गुप्त नवरात्रि माता दुर्गा की आराधना का एक विशेष पर्व है। इसे "गुप्त" इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें साधना, पूजा और तांत्रिक उपासना प्रायः गुप्त (एकांत) रूप से की जाती है। यह सामान्य चैत्र और शारदीय नवरात्रि की तरह सार्वजनिक उत्सव नहीं होता।
गुप्त नवरात्रि कब आती है?
वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्रि आती है माघ गुप्त नवरात्रि (जनवरी–फरवरी), आषाढ़ गुप्त नवरात्रि (जून–जुलाई
। दोनों ही नौ दिनों तक चलती हैं।
गुप्त नवरात्रि मनाने का उद्देश्य
माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना।
आध्यात्मिक उन्नति और आत्मबल प्राप्त करना।
तंत्र, मंत्र और गूढ़ साधनाओं का अभ्यास।
शत्रु बाधा, भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा की कामना।
धन, सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना।
Updated on:
7 Jul 2026, 5:45 PM IST
Published on:
7 Jul 2026, 5:45 PM IST
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