
Digital Education: राजस्थान सरकार सरकारी विद्यालयों को 21वीं सदी की आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के लिए स्मार्ट क्लास, डिजिटल लर्निंग और तकनीक आधारित शिक्षण पर लगातार निवेश कर रही है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि राजस्थान में आज भी 9227 विद्यालय ऐसे हैं, जहां बिजली की सुविधा नहीं है। इनमें अकेले 7076 सरकारी विद्यालय शामिल हैं। बिजली के अभाव में इन स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, पंखे और शुद्ध पेयजल के लिए लगाए फिल्टर तक उपयोग में नहीं आ पा रहे हैं।
ऐसे में डिजिटल शिक्षा का सपना अब भी अधूरा है। ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ रेगिस्तानी क्षेत्रों के विद्यालयों में हालात ज्यादा गंभीर है। इन इलाकों में बिजली नहीं होने से बच्चे आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति और डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार स्मार्ट क्लास और आइसीटी आधारित शिक्षा पर जोर दे रही है, लेकिन बिजली के अभाव में ग्रामीण विद्यालयों में यह व्यवस्था प्रभावी नहीं हो पा रही।
राजस्थान के अनेक प्राथमिक विद्यालय दोहरी समस्या का सामना कर रहे हैं। एक ओर बिजली नहीं है, दूसरी ओर जर्जर भवन और कक्षाओं की कमी भी चुनौती बनी हुई है। कई विद्यालयों में एक ही कमरे में दो से तीन कक्षाएं संचालित हो रही हैं। कई जगह प्रयोगशाला, पुस्तकालय और डिजिटल कक्ष जैसी सुविधाएं केवल कागजों में सीमित हैं।
शिक्षा विभाग ने बिजली विहीन विद्यालयों में सौर ऊर्जा आधारित सिस्टम लगाने की योजना बनाई है। उत्कृष्ट योजना के तहत इन विद्यालयों में सोलर प्लांट लगाए जाएंगे। इससे स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर, पंखे, पेयजल फिल्टर और अन्य शैक्षणिक उपकरण सुचारू रूप से संचालित हो सकेंगे। साथ ही बिजली बिल का अतिरिक्त बोझ भी नहीं रहेगा। विभाग का मानना है कि दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों के विद्यालयों के लिए सौर ऊर्जा सबसे टिकाऊ और व्यावहारिक समाधान है।
राजस्थान में कुल विद्यालय (सभी प्रबंधन)
कुल विद्यालय- 106302
सरकारी- 70155
निजी- 33548
अन्य- 2599
कुल- 98054
सरकारी- 63752
निजी- 32150
अन्य- 2152
कुल- 97075
सरकारी- 63,079
निजी- 31883
अन्य- 2113
कुल 9227
सरकारी- 7076
निजी- 1665
अन्य- 486
(यू-डाइसः शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली)