
उदयपुर. राजस्थान में खनिज परिवहन की आड़ में हो रही बड़े पैमाने की रॉयल्टी चोरी और ओवरलोडिंग के खेल को खत्म करने के लिए खान एवं भू-विज्ञान विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने शुक्रवार को आदेश जारी किया कि परिवहन विभाग कि ओर से तय वाहन की 100% अधिकतम भार वहन क्षमता से कम भार पर रवन्ना (टीपी) जारी नहीं किया जाएगा।
इस आदेश को लेकर अतिरिक्त निदेशक-खान (मुख्यालय) महेश माथुर ने बताया कि यह कड़ा नियम राॅयल्टी की चोरी रोकने के लिए अपनाया गया है। शिकायतें मिल रही थी कि 20 टन भार वहन क्षमता वाले डंपर या ट्रकों के लिए लीज होल्डर और ट्रांसपोर्टर रॉयल्टी बचाने के चक्कर में महज 8 या 10 टन का ही रवन्ना कटवा रहे थे। जबकि वाहन पूरी क्षमता या उससे भी अधिक भार लेकर सड़कों पर दौड़ते हैं। इसका सीधा मतलब यह था कि प्रति चक्कर 10 से 12 टन खनिज की रॉयल्टी सीधे तौर पर चोरी कर सरकारी राजस्व को भारी चूना लगाया जा रहा था। इसी संगठित चोरी, अंडर-बिलिंग और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए 100% भार वहन क्षमता के आधार पर ही रवन्ना जारी करने का अनिवार्य नियम लागू किया गया है।
ओवरलोडिंग और फर्जीवाड़े पर नकेल
जानकारों के अनुसार, सिस्टम में कम रवन्ना काटकर अधिक माल ले जाने और धर्मकांटों पर साठगांठ कर रॉयल्टी दबाने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। 20 टन की क्षमता दिखाकर गाड़ियां 30 से 40 टन तक ओवरलोड होकर निकलती थीं, इससे राजस्व का नुकसान तो होता ही था, साथ ही सड़कें भी बदहाल हो रही थीं।
व्यावहारिक दिक्कतों का दिया हवाला
इधर, नए आदेश के बाद खनन पट्टाधारकों का तर्क है कि यदि किसी 25 टन क्षमता वाले वाहन में कांटे पर 24.5 टन खनिज भरता है, तो भी उन्हें पूरे 25 टन का शुल्क चुकाना पड़ेगा। उनका कहना है कि ओवरलोडिंग की पेनल्टी से बचने के लिए कई बार गाड़ी में मामूली कम माल भरा जाता है।