
बड़ा बाजार...
उदयपुर. उदयपुर शहर की स्थापना के साथ ही अस्तित्व में आया ऐतिहासिक बड़ा बाजार और उसके आसपास का व्यापारिक क्षेत्र आज भी अपनी सांस्कृतिक व व्यावसायिक विरासत को सहेजे हुए है। सभी धर्मों के व्यापारियों के सद्भाव वाले इस बाजार ने मेवाड़ की प्रसिद्ध 'डंकावर्क' तथा सोने-चांदी के 'गोटा-किनारी' काम को वैश्विक पहचान दिलाई। यद्यपि कीमती धातुओं के बढ़ते दामों के कारण यह पारंपरिक कार्य अब सीमित रह गया है, फिर भी वर्तमान में यहां संचालित 400 से अधिक दुकानों में से लगभग 300 दुकानें ज्वैलरी की हैं।
ऐतिहासिक रूप से समृद्ध इस बाजार की छोटी बोहरवाड़ी में छीपा समुदाय की ओर से कपड़ों की छपाई-रंगाई का कार्य किया जाता था, वहीं कोलपोल क्षेत्र साड़ियों और परिधानों का प्रमुख केंद्र रहा है। आज भी यहां पगड़ी, साफे, बंधेज, बांधनी जैसी राजस्थानी पोशाकों के साथ-साथ पंसेरी, इत्र, धार्मिक वस्तुओं, कशीदाकारी और बर्तनों की विविधता देखने को मिलती है।
बुनियादी सुविधाओं की कमी से घट रहा ग्राहकों का ठहराव
शहर का मुख्य व्यापारिक केंद्र होने के बावजूद सुविधाओं के अभाव में यहां ग्राहकों का आना-जाना प्रभावित हो रहा है। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि बाजार के ऐतिहासिक स्वरूप को बचाने और विलुप्त होती कलाओं को प्रोत्साहन देने के लिए व्यवस्थाओं में सुधार अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक अस्थल मंदिर के पास से चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया गया है।
यशवंत आंचलिया, संरक्षक, बड़ा बाजार व्यापार संघ
महिलाओं के लिए शौचालय नहीं, उलझा रहा गूगल मैप
सिटी पैलेस जाने के लिए पर्यटकों की ओर से गूगल मैप का सहारा लेने के कारण बड़ा बाजार मार्ग में आए दिन यातायात बाधित होता है। इसके अलावा, बाजार में पुरुषों की तुलना में महिला खरीदारों की संख्या अधिक रहती है, लेकिन उनके लिए पूरे परिसर में एक भी शौचालय नहीं है। पुरुषों के लिए उपलब्ध एकमात्र शौचालय भी बेहद गंदा है।
अजय पोरवाल, अध्यक्ष, बड़ा बाजार व्यापार संघ
मालदास स्ट्रीट के बाहर पार्किंग व्यवस्था बेपटरी
मालदास स्ट्रीट के बाहर पहले सड़क के बीचों-बीच पार्किंग की जाती थी और दोनों तरफ से सुचारू रूप से वाहनों का आवागमन होता था। लेकिन धीरे-धीरे एक तरफ स्थायी रूप से वाहन खड़े रहने लगे हैं। स्थिति यह है कि दो ऑटो आमने-सामने आ जाने पर घंटों जाम लग जाता है। व्यापारियों ने मांग की है कि सड़क पर मार्किंग (चिह्नांकन) करके पार्किंग व्यवस्था को तुरंत सुधारा जाए।
राजेश तोतावत, व्यवसायी
Updated on:
23 Oct 2026, 6:40 PM IST
Published on:
23 Oct 2026, 6:40 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.