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उदयपुर : आठ माह जैसे-तैसे खींच लेंगे, अगला मानसून भी कमजोर हुआ तो…

जलदाय विभाग अगले मानसून तक जलापूर्ति बनाए रखने के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर है। अगले मानसून में भी कम बारिश हुई तो हालात बिगड़ सकते हैं। विभाग ने 41 करोड़ रुपए का आपातकालीन एक्शन प्लान तैयार किया है, जिसके तहत 61 पानी की टंकियों के पास नलकूप खोदे जाएंगे। पिछोला झील के डेड स्टोरेज को बचाने के साथ जयसमंद और उदयसागर से पानी लाने की परियोजनाएं शहर के लिए बेहद जरूरी हैं।
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उदयपुर

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Mukesh Gaur

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Updated: 24 Oct 2026, 6:09 PM IST

pichola lake udaipur

हे ईश्वर... हम नहीं देखना चाहते पिछोला की ऐसी तस्वीर, फोटो दो दशक पहले का है, जब पिछोला झील पूरी तरह से सूख चुकी थी। 

उदयपुर. आगामी समय में शहर में पानी को लेकर बनने वाले हालात से सब वाकिफ हैं। जलदाय विभाग अगले मानसून (जुलाई) तक जलापूर्ति की व्यवस्थाएं निर्बाध बनी रहने का दावा कर रहा है। वर्तमान की स्थिति और किए जा रहे वैकल्पिक बंदोबस्त से खींच-तानकर व्यवस्थाएं बनाए रख भी सकते हैं, लेकिन अगला मानसून कमजोर नहीं होगा, इसकी गारंटी किसी के पास नहीं। जरा सी भी आशंका रही और अगला मानसून कमजोर हुआ तो कैसे व्यवस्थाएं बनी रहेंगी। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। ऐसे में बेहद जरुरी हो गया है कि जयसमंद से बड़ी पाइपलाइन के प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा किया जाए और अमृत प्रोजेक्ट के तहत प्रस्तावित उदयसागर से पानी लेने का काम पूरा हो। ये दोनों प्रोजेक्ट उदयपुर की दशकों बाद तक की समस्या हल कर सकते हैं, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर लचर व्यवस्था प्रोजेक्ट को आगे नहीं बढ़ने दे रहे।

जलदाय विभाग फिलहाल विभिन्न वैकल्पिक स्रोतों को जोड़कर आगामी मानसून तक शहर को गंभीर सूखे से बचाने की उम्मीद जता रहा है। हालांकि, तकनीकी जानकारों का मानना है कि यह केवल कामचलाऊ व्यवस्था है। यदि अगला मानसून भी कमजोर रहा या समय पर सक्रिय नहीं हुआ तो शहर में हालात बेकाबू हो सकते हैं। भूजल स्तर लगातार गिरने के कारण केवल ट्यूबवेल के सहारे लंबी अवधि तक लाखों की आबादी को जलापूर्ति देना तकनीकी रूप से संभव नहीं होगा।

भूजल पर निर्भरता: 61 टंकियों के पास खुदेंगे नलकूप

शहर में गहराते जल संकट के बीच जलदाय विभाग ने पारंपरिक जलस्रोतों पर निर्भरता कम करने के लिए टंकियों को स्थानीय स्तर पर 'आत्मनिर्भर' बनाने का बड़ा खाका खींचा है। योजना के तहत शहर में जहां-जहां उच्च जलाशय (पानी की टंकियां) हैं, उनके आसपास भूजल स्तर के आधार पर नलकूप खोदे जाएंगे। ये नलकूप सीधे टंकियों को भरेंगे, जिससे झीलों से लगातार हो रहे पानी के भारी उठाव में कमी लाई जा सकेगी। विभाग का प्राथमिक उद्देश्य पिछोला के डेड स्टोरेज को बचाना है, क्योंकि यदि पिछोलारीत गई तो पूरे शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। जलदाय विभाग ने 41 करोड़ का इमरजेंसी एक्शन प्लान तैयार किया है। इसके तहत तकनीकी और भूगर्भीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए जियोलॉजिस्ट की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बोरवेल की लोकेशन तय की गई है।

प्रस्तावित कार्य योजना

- फोकस पिछोला को बचाना है, क्योंकि शहर की अधिकांश आबादी तक पिछोला का पानी पहुंचता है, ऐसे में नलकूप की रणनीति बनाई है।

- सिटी डिवीजन प्रथम: इस क्षेत्र की 54 पानी की टंकियों के पास नए नलकूप खोदे जाएंगे, जो सीधे टंकियों में पानी की आवक सुनिश्चित करेंगे।

- सिटी डिवीजन द्वितीय: क्षेत्र में 7 टंकियों को भरने के लिए नलकूपों का चयन किया गया है। इस डिवीजन में ज्यादातर उपनगरीय क्षेत्र शामिल हैं।

- अतिरिक्त स्रोतों से लिफ्टिंग: बड़ी तालाब से पानी के उठाव के साथ ही खरबड़िया और कानपुर में नलकूप से 8 एमएलडी पानी लाने की तैयारी है।

- प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति मिलते ही इन सभी कार्यों को युद्धस्तर पर शुरू करने का दावा किया जा रहा है। फिलहाल फाइल मुख्यालय स्तर पर है।