
जयपुर. मोहल्ले में कौन रहता है, कौन-सा मकान बंद है, कहां संदिग्ध किरायेदार हैं और किस गली में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं... अब इन तमाम जानकारियों के लिए पुलिसकर्मियों को कागजी रजिस्टरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। राजस्थान पुलिस ने बीट प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल बनाते हुए 'ई-बीट व्यवस्था' लागू कर दी है। डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। एक दिसंबर से इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा।
इसलिए पड़ी जरूरत
अब तक बीट बुक में हाथ से जानकारी दर्ज की जाती थी। अक्सर यह शिकायतें सामने आती थीं कि बीट पुलिसकर्मी कागजों में खानापूर्ति कर रहे हैं और धरातल पर क्षेत्र की कोई पुख्ता जानकारी नहीं होती। नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य कागजी रिकॉर्ड से आगे बढ़कर पुलिस की मैदानी मौजूदगी और जवाबदेही तय करना है। पहले चरण में नौ जिलों में यह प्रणाली शुरू हो चुकी है।
ई-बीट प्रणाली की मुख्य बातें
- डिजिटल सर्वे (15 दिसंबर तक): बीट अधिकारी आवासीय, व्यावसायिक भवनों और कार्यालयों का सर्वे कर मकान मालिकों, किरायेदारों, घरेलू सहायकों, वाहनों व आर्म्स लाइसेंस का पूरा ब्योरा ई-बीट बुक में दर्ज करेंगे। बंद मकानों और सीसीटीवी कैमरों की मैपिंग भी होगी।
- रोजाना 5 संपर्क और रात्रि विश्राम: बीट अधिकारी को हर दिन कम से कम 5 घरों, दुकानों या संस्थानों से संपर्क करना होगा। शहरी इलाकों में सप्ताह में 3 और ग्रामीण इलाकों में 2 बार भ्रमण तथा हर 15 दिन में बीट क्षेत्र में एक रात्रि विश्राम अनिवार्य किया गया है।
- बुजुर्गों की सुध: अकेले रहने वाले 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों, दिव्यांगों और जरूरतमंद परिवारों से नियमित संपर्क बनाए रखना इनकी जिम्मेदारी होगी।
- जीपीएस से होगी मॉनिटरिंग: ई-बीट बुक में जीपीएस लोकेशन, गश्त मार्ग और 'राजकॉप सिटीजन ऐप' की कनेक्टिविटी जोड़ी जा रही है। इससे अभय कमांड सेंटर से सीधे पुलिसकर्मियों की लोकेशन और सक्रियता पर नजर रखी जा सकेगी।