उदयपुर

कैंसर के इलाज में राजस्थान की बड़ी उपलब्धि, कीमोथेरेपी का विकल्प तैयार, अब मुंह से दवा देने की विशेष तकनीक विकसित

मोहनलाल सुखाड़िया विवि के फार्मेसी विभाग की प्रोफेसर डॉ. गरिमा जोशी और उनके शोधार्थी शेख शहनवाज कादिर ने कैंसर की दवा को मुंह से देने के लिए विशेष 'ओरल नैनो-फॉर्मूलेशन' तकनीक विकसित की है।
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Oct 19, 2026
Cancer Treatment Technology
डॉ. गरिमा जोशी व शोधार्थी शेख शहनवाज कादिर। फोटो: पत्रिका

उदयपुर। कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी और रेडिएशन के दुष्प्रभावों से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद जगी है। मोहनलाल सुखाड़िया विवि के फार्मेसी विभाग की प्रोफेसर डॉ. गरिमा जोशी और उनके शोधार्थी शेख शहनवाज कादिर ने कैंसर की दवा को मुंह से देने के लिए विशेष 'ओरल नैनो-फॉर्मूलेशन' तकनीक विकसित की है। इस तकनीक के लिए शोध टीम को पेटेंट भी मिला है। शुरुआती प्रयोगशाला और चूहों और आंतों की कोशिकाओं पर किए गए परीक्षणों में उत्साहजनक नतीजे सामने आए हैं।

यह शोध मुख्य रूप से अग्नाशय (पैंक्रियाटिक) के कैंसर पर केंद्रित रहा। शोध के परीक्षणों में सामान्य दवा की तुलना में नए फॉर्मूलेशन का अवशोषण 165 प्रतिशत से अधिक बेहतर पाया गया। कैंसर कोशिकाओं में 31.4 प्रतिशत तक एपोप्टोटिक प्रभाव यानी कोशिकाओं की नियंत्रित मृत्यु से जुड़े परिणाम भी दर्ज किए गए।

मरीजों तक पहुंचने में अभी समय

शोध टीम के अनुसार, तकनीक अभी प्रयोगशाला व पशु परीक्षण के स्तर पर है। मरीजों में इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता साबित करने के लिए क्लीनिकल ट्रायल जरूरी हैं। इसलिए फिलहाल इसे कैंसर का स्थापित उपचान या कीमोथेरेपी का विकल्प नहीं माना ज सकता। सफल परीक्षणों के बाद यह तकनीक दवा देने के सुविधाजनक तरीके का रास्ता खोल सकती है।

शोध को मिला अंतरराष्ट्रीय मंच

शोध के लिए शेख शहनवाज कादिर को ब्रिटेन की कॉमनवेल्थ स्प्लिट-साइट फेलोशिप मिली। उन्होंने लिवरपूल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर इमरान सलीम के मार्गदर्शन में पीएचडी के शोध का एक हिस्सा पूरा किया। शोधपत्र ऑस्ट्रिया की ग्राज यूनिवर्सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भी प्रस्तुत किया गया।

नैनो तकनीक से दवा के अवशोषण में सुधार

डॉ. जोशी के अनुसार, वर्ष 2021 में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत मिले शोध प्रोजेक्ट से इस काम की शुरुआत हुई। इसके लिए आधुनिक उपकरणों से युक्त नैनो-फॉर्मूलेशन रिसर्च लैब स्थापित की गई। शोध में कैंसर की दवा पैक्लिटैक्सेल को फॉस्फेटिडिलकोलीन की विशेष दोहरी परत में तैयार किया गया, ताकि वह आंतों की बाधाओं को पार कर शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित हो सके।

Updated on:
19 Oct 2026 08:20 am
Published on:
19 Oct 2026 08:20 am