उदयपुर

उदयपुर : रसूखदार का भवन या आमजन की राह… सड़क खुले तो 50 हजार लोगों को मिले राहत

हिरणमगरी के जड़ाव नर्सरी मार्ग पर सरकारी जमीन पर बने विवादित भवन की कार्रवाई डीएलबी की रोक के कारण अटक गई है, जबकि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद भी मामला लंबित है।
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Jun 25, 2026
high court desicon on land
वीआइपी कॉलोनी से निकला 1100 फीट मार्ग, आगे यह जड़ाव नर्सरी से मिलना है लेकिन बंद पड़ा है

उदयपुर. हिरणमगरी के जड़ाव नर्सरी मार्ग पर सरकारी जमीन पर बने विवादित भवन का मामला फिर अटक गया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस जमीन को सरकारी मानने और कब्जाधारी को अतिक्रमणकारी घोषित करने के बाद नगर निगम ने यहां पर पट्टे निरस्त कर दिए थे। इसके बाद हाईकोर्ट ने भी नियमानुसार फैसला लेने के आदेश दिए थे। इसके बावजूद, सुनवाई से ठीक पहले स्वायत्त शासन विभाग (डीएलबी) की ओर से रोक लगाने से कार्रवाई ठप हो गई है। इस गतिरोध के कारण मार्ग का रास्ता बंद है, जिससे सेक्टर-7, 9, 14, सवीना और गीतांजलि हॉस्पिटल की ओर जाने वाले करीब 50 हजार लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह विवाद वर्ष 2007-08 से जुड़ा है, जब एक भू-व्यवसायी ने करीब 8 हजार वर्गफीट जमीन खरीदी थी। आरोप है कि इसके बाद पास की ही करीब 4 हजार वर्गफीट सरकारी जमीन महज 1.35 लाख रुपए में आवंटित कर दी गई। बाद में प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत 12 हजार वर्गफीट जमीन का पट्टा जारी कर दिया गया। तत्कालीन नगर नियोजकों की आपत्तियों को दरकिनार कर यह पट्टा तब जारी हुआ, जब मौके पर बिना किसी वैध निर्माण स्वीकृति के पहले ही भवन बनकर तैयार हो चुका था।

मास्टर प्लान में सड़क और अंडरपास

यह विवाद सिर्फ पट्टे या जमीन के आवंटन तक सीमित नहीं है। बताया जा रहा है कि मास्टर प्लान में इस हिस्से में रेलवे अंडरपास और सड़क का प्रस्ताव पहले से था। ऐसे में जब यह जमीन सार्वजनिक मार्ग और यातायात योजना से जुड़ी थी, तो इसे निजी पट्टे में कैसे दिया गया। इस मुद्दे पर उस समय भी विरोध हुआ था। बाद में विधायक स्तर पर मामला उठने के बाद तत्कालीन नगर निगम आयुक्त ने पूरे रिकॉर्ड की जांच कर पट्टे निरस्त कर दिए। मामला यहीं नहीं रुका पट्टा निरस्त करने के खिलाफ संबंधित पक्ष हाईकोर्ट पहुंच गया। वहां दलील दी गई कि बिना सुनवाई का पूरा अवसर दिए पट्टे निरस्त कर दिए गए। इस पर हाईकोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिए कि संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर देकर नियमानुसार फैसला लिया जाए। लेकिन निगम में सुनवाई शुरू होने से पहले ही डीएलबी से आदेश आ गया कि अगले आदेश तक सुनवाई नहीं की जाए। इसके बाद से मामला फिर अटक गया।

रेलवे की भी एनओसी नहीं

मौके पर बने भवन में 12 हजार वर्गफीट जमीन पर बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और प्रथम तल तक निर्माण है और इसका उपयोग भी किया जा रहा है। आरोप यह भी है कि भवन के लिए न तो निर्माण स्वीकृति ली गई और न ही रेलवे से एनओसी प्राप्त की गई। जबकि रेलवे लाइन के 150 फीट दायरे में निर्माण के लिए रेलवे की अनुमति जरूरी होती है। बताया जा रहा है कि यह निर्माण रेलवे लाइन से करीब 50 फीट दूरी पर है। रिकॉर्ड में यह तथ्य भी है कि फिर भी मामले में कार्रवाई नहीं हो रही।

राहत का रास्ता भी फंसा

जड़ाव नर्सरी मार्ग खुलने पर सेक्टर-7, 9, 14, सवीना और गीतांजलि हॉस्पिटल की ओर जाने वाले ट्रैफिक को राहत मिल सकती है। इस मार्ग के खुलने से प्रतिदिन करीब 50 हजार लोगों की आवाजाही आसान होगी। इस हिस्से में जाम व गलत दिशा से होने वाली आवाजाही कम हो सकेगी। अभी यह रास्ता बंद होने से शहर के इस हिस्से में ट्रैफिक दबाव बना रहता है और लोगों को लंबा चक्कर लगाकर निकलना पड़ता है।

लोगों के हित में इस मामले में जल्द निर्णय लिया जाएगा। डीएलबी में यह फाइल कहां अटकी है, इसकी जानकारी ली जाएगी और जरूरत पड़ी तो पूरे मामले से मुख्यमंत्री को भी अवगत कराया जाएगा। यह शहर की यातायात व्यवस्था और सरकारी जमीन की सुरक्षा से भी जुड़ा है।

फूलसिंह मीणा, ग्रामीण विधायक

मामले को निगम बोर्ड में उठाया था, उसके बाद ही इस पर कार्रवाई हुुई। मामले में हाईकोर्ट भी कह चुका है कि सुनवाई कर निर्णय लिया जाए लेकिन निगम की सुनवाई से पूर्व ही डीएलबी ने फाइल रोक दी। यह मार्ग खुलेगा तो इस क्षेत्र के करीब 50 हजार लोगों को राहत मिलेगी।

आशीष कोठारी, पूर्व भवन निर्माण समिति अध्यक्ष

Published on:
25 Jun 2026 06:05 pm
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