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उदयपुर में कोचिंग सेंटर्स के हालात कैसे हैं? दिल्ली-लखनऊ त्रासदी के बाद भी नहीं चेता शहर, सामने आई सच्चाई

Udaipur Coaching Centres: उदयपुर में कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी और हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। पत्रिका की पड़ताल में कई संस्थान बेसमेंट में संचालित मिले, जहां फायर सेफ्टी इंतजाम नाकाफी थे। नगर निगम ने 685 भवनों का सर्वे कर 337 को नोटिस दिए हैं, लेकिन अब तक किसी भवन को सीज नहीं किया गया।
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Udaipur Coaching Centres

उदयपुर के कोचिंग सेंटर्स पर पत्रिका की पड़ताल (पत्रिका फोटो)

Rajasthan Udaipur Coaching Centres: उदयपुर: पहले दिल्ली फिर लखनऊ के कोचिंग सेंटर्स में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। उन हादसों में सामने आया कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी और कमाई की अंधी होड़ ने बच्चों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया था। इन त्रासदियों से सबक लेने के बजाय उदयपुर में भी हालात कम चिंताजनक नहीं हैं।
पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि शहर में कई भवन ऐसे हैं, जहां शिक्षा, आवास और व्यवसाय किया जा रहा है और वहां सुरक्षा से ज्यादा प्राथमिकता किराए और कमाई को दी जा रही है।

बड़ा सवालः आग लगी तो कैसे निकलेंगे

हिरणमगरी क्षेत्र में 100 फीट रोड पर गर्ल्स हॉस्टल है। चार मंजिला भवन में 127 छात्राएं रह रही हैं। भवन के बेसमेंट में मेस और लाइब्रेरी संचालित हो रही है। मौके पर करीब 50 छात्राएं मौजूद थीं। छात्राओं ने बताया कि भवन से बाहर निकलने का केवल एक ही रास्ता है।

बेसमेंट में खाना पकाया जा रहा था और धुएं की निकासी के लिए केवल पाइप का सहारा लिया गया था। यदि शॉर्ट सर्किट, गैस रिसाव या आग लगने जैसी स्थिति बने तो धुआं और लपटें पूरे भवन को चंद मिनटों में अपनी चपेट में ले सकती हैं। ऐसे में छात्राओं के लिए सुरक्षित निकासी एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

नजर आए खुले तार और खराब फायर सिस्टम

हिरणमगरी में एक अन्य कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में आरएएस अभ्यर्थियों की कक्षाएं संचालित हो रही थी। वहां करीब 45 विद्यार्थी थे। बेसमेंट टेबल-कुर्सियों से भरा था। फायर फाइटिंग सिस्टम खराब था। वहीं, बिजली के तार किसी संभावित हादसे को निमंत्रण देते दिखाई दिए। जहां भविष्य गढ़ने की तैयारी हो रही थी, वहां सुरक्षा व्यवस्था गायब थी।

एक अन्य कोचिंग संस्थान के बेसमेंट में नए बैच शुरू करने की तैयारी चल रही थी। कई स्थानों पर बेसमेंट में लाइब्रेरी, कैंटीन और अन्य गतिविधियां संचालित होती मिली। कुछ भवनों की ऊपरी मंजिलों पर स्कूल और शैक्षणिक संस्थान भी संचालित पाए गए। अधिकांश स्थानों पर फायर सेफ्टी उपकरण केवल औपचारिकता भर नजर आए। कहीं अग्निशमन यंत्र धूल खा रहे थे तो कहीं उनकी उपयोगिता संदिग्ध थी।

ऐसे होना चाहिए सुरक्षा मानक

बेसमेंट में किसी भी प्रकार की शैक्षणिक गतिविधि, लाइब्रेरी या आवासीय उपयोग के लिए पर्याप्त वेंटिलेशन, स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म, अग्निशमन यंत्र, इमरजेंसी लाइटिंग, वैकल्पिक निकास मार्ग और नियमित सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य हैं। नेशनल बिल्डिंग कोड और अग्निशमन सुरक्षा मानकों के अनुसार, बहुमंजिला भवनों में सुरक्षित निकासी व्यवस्था और फायर एनओसी आवश्यक है। लेकिन शहर में कई भवन ऐसे मिले जहां नियम सिर्फ दीवारों पर टंगे थे।

नोटिसों में उलझी कार्रवाई

नगर निगम ने शहर में ऐसे लगभग 4 हजार भवन चिन्हित किए हैं, जिनकी सुरक्षा जांच आवश्यक मानी गई है। अब तक केवल 685 भवनों का सर्वे हुआ है और 337 भवनों को नोटिस जारी किए गए हैं। नियमों की अनदेखी पाए जाने के बावजूद अब तक एक भी भवन को सीज नहीं किया गया।

जिन भवनों में रोजाना सैकड़ों स्टूडेंट्स घंटों समय बिता रहे हैं, वहां सुरक्षा खामियां पाए जाने के बाद भी संचालन जारी रहना चिंता का विषय है। यदि किसी दिन आग, शॉर्ट सर्किट या धुआं भरने जैसी घटना होती हैं तो परिणाम भयावह हो सकते हैं।

शहर में संभावित जोखिम वाले करीब 4 हजार भवन चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 685 भवनों का सर्वे पूरा हो चुका है तथा 337 भवनों को नोटिस जारी किए गए हैं। संबंधित संस्थानों और भवन संचालकों से सुरक्षा मानकों की पालना करवाई जा रही है तथा सर्वे और जांच की कार्रवाई जारी है।
-बाबूलाल चौधरी, फायर ऑफिसर, नगर निगम