उदयपुर

आजादी के बाद बनी इस स्कूल की छत पर उदासीनता की टपकन, जोखिम में है छात्राओं की जिंदगी

sarkari school वर्ष 1972 में स्थापित स्कूल में खल रही सुविधाओं की कमी
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आजादी के बाद बनी इस स्कूल की छत पर उदासीनता की टपकन, जोखिम में है छात्राओं की जिंदगी
आजादी के बाद बनी इस स्कूल की छत पर उदासीनता की टपकन, जोखिम में है छात्राओं की जिंदगी

उदयपुर/ मूंगाणा. sarkari school खेरवाड़ा उपखण्ड के थोबावाड़ा में दीवार ढहने से हुई स्कूली बच्चों की मौत से सबक लेते हुए शिक्षा विभाग ने टपकती स्कूलों में अध्यापन कार्य के लिए भले ही पाबंदी लगा दी हो, लेकिन व्यवस्था सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। न ही इस बारे में विभागीय स्तर पर कोई अतिरिक्त बजट जारी किया गया है। क्षेत्र में वर्ष 1972 से स्थापित राबाउप्रावि में पढऩे वाली छात्राओं की जिंदगी इन दिनों ऐसे ही संकट से जूझ रही है। शुरुआत से ही विद्यालय में कक्षाकक्षों की कमी रही है। इसके बाद 2006 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत एक बरामदा बनाया गया, जो बरसात के दौरान टपकता है। ऐसे में सावधानी के तौर पर स्कूल प्रशासन की ओर से बालिकाओं की छुट्टी कर दी जाती है। गौरतलब है कि पूर्व में भी पुराने तीन कक्षाकक्षों को एसएमसी कमेटी की ओर से गिराने की कार्रवाई की जा चुकी है। विभागीय लापरवाही के बीच जनजाति बालिकाओं को शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है।

प्रस्ताव बनाकर भेजा
बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय में भवन निर्माण को लेकर ग्राम पंचायत की ओर से प्रस्ताव बनाकर सम्बन्धित विभाग व क्षेत्रीय विधायक को भिजवाया है।
हरीशचन्द्र मीणा, सरपंच, मूंगाणा

शिक्षक व विद्यार्थी परेशान
भवन के अभाव में विद्यार्थी व स्टाफ को समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में नामांकन संख्या में कमी आ रही है। sarkari school विभाग के उच्चाधिकारियों को इस बारे में बता रखा है। विद्यालय काफ ी पुराना है। विद्यालय को क्रमोन्नत करने की भी आवश्यकता है।

कैलाश मीणा, संस्थापिका, राबाउप्रावि मूंगाणा

Published on:
03 Oct 2019 06:00 am