अमृत 2.0 के तहत 180 करोड़ की योजना, 150 किमी लाइन में से 110 किमी बिछी, फर्म के 30 करोड़ बकाया उदयपुर. अमृत 2.0 योजना के तहत शहर में चल रहा सीवर लाइन डालने का कार्य पिछले करीब डेढ़ माह से बंद पड़ा है। काम कर रही फर्म को भुगतान नहीं मिलने से प्रोजेक्ट अटक गया […]
अमृत 2.0 के तहत 180 करोड़ की योजना, 150 किमी लाइन में से 110 किमी बिछी, फर्म के 30 करोड़ बकाया
उदयपुर. अमृत 2.0 योजना के तहत शहर में चल रहा सीवर लाइन डालने का कार्य पिछले करीब डेढ़ माह से बंद पड़ा है। काम कर रही फर्म को भुगतान नहीं मिलने से प्रोजेक्ट अटक गया है। ऐसे में कई क्षेत्रों में सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं और लोग रोजाना परेशानी झेलने को मजबूर हैं।अमृत 2.0 योजना के तहत शहर के विभिन्न क्षेत्रों में करीब 180 करोड़ रुपए की लागत से 150 किमी लंबी सीवर लाइन डाली जानी है। अब तक 110 किलोमीटर से अधिक लाइन बिछाई जा चुकी है। योजना पूरी होने पर शहर में करीब 18 हजार सीवर कनेक्शन दिए जाएंगे।
यह कार्य
सेक्टर-11, सेक्टर-13, सविना, लक्ष्मीनारायण नगर, वर्मा कॉलोनी, सविना गांव, रेती स्टैंड, गायरियावास सहित आसपास के क्षेत्रों में चल रहा था। लेकिन भुगतान अटकने के कारण फर्म ने करीब डेढ़ माह पहले काम बंद कर दिया।काम बंद होने से कई स्थानों पर सीवर लाइन डालने के बाद सड़कों को केवल मिट्टी से भर दिया गया है। इससे सड़कें ऊंची-नीची हो गई हैं और बीच-बीच में बने सीवर चैंबर के उठे हुए ढक्कन वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। वहीं पैदल चलना भी लोगों के लिए मुश्किल हो गया है।
फर्म के 30 करोड़ रुपए बकाया
सूत्रों के अनुसार सीवर लाइन डालने वाली फर्म के तीन बिलों के करीब 30 करोड़ रुपए राज्य स्तर पर अटके हुए हैं। भुगतान नहीं मिलने के कारण फर्म ने करीब डेढ़ माह पहले काम रोक दिया। अब उम्मीद जताई जा रही है कि राशि जारी होते ही कार्य दोबारा शुरू हो सकेगा।
लंबे समय से परेशान हो रहे लोग
सीवर लाइन डालने का कार्य करीब एक साल पहले शुरू हुआ था। जिन क्षेत्रों में खुदाई की गई थी, वहां के लोग लंबे समय से परेशानी झेल रहे हैं। कई जगह लाइन डालने के बाद सड़क का डामरीकरण किया गया, लेकिन वह भी जगह-जगह धंस गया है। इससे स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की परेशानी और बढ़ गई है।
समय सीमा बढ़ने की आशंका
इस परियोजना को इसी वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन बीच में काम बंद होने से अब इसके निर्धारित समय पर पूरा होने पर संशय बन गया है।