
उदयपुर . महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय में अवांछित निर्माण इस इमारत की डिजाइन और व्यवस्थाओं को चुनौती दे रहे है। ‘मनमानी का ग्रहण’ चिकित्सालय परिसर के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है। मामला पुरानी सेंट्रल लैब के बाहर, वर्तमान सेंट्रल लैब के सामने और स्वाइन फ्लू वार्ड के पीछे ऑक्सीजन प्लांट के समीप टीन शेड से जुड़ा हुआ है। मनमानी इसलिए कहेंगे क्योंकि ये सभी निर्माण सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से एनओसी (नोट ऑप्जेक्शन सर्टिफिकिट) नहीं लेकर हो रहा है।
ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि इंजीनियर द्वारा सेटबेक रखते हुए तैयार की इमारतों के बाहर अवंाछित निर्माण का भविष्य क्या होगा। स्थिति तब और चिंताजनक हो रही है, जब इस तरह के निर्माण से वार्डों तक पहुंचने वाली धूप, हवा और रोशनी सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।
संक्रमण का संकट!
अवांछित निर्माण ने चिकित्सालय में संक्रमण का संकट बढ़ा दिया है। वजह साफ है कि टीन शेड से वार्ड की खिड़कियों के पास खुलापन खत्म होने के साथ अंधेरा छा रहा है। दिन में चिकित्सालयों के गलियारों में अंधेरा बढ़ा रहा है। विशेष तौर पर स्वाइन फ्लू वार्ड के समीप निर्माण से स्थिति गंभीर हो गई है। यह जानते हुए कि स्वाइन फ्लू का वायरस नमी और कम तापमान पर अधिक सक्रिय होता है। इसके बावजूद वार्ड के समीप मनमाना निर्माण किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इस कार्य को एक निजी समाजसेवी संस्था के माध्यम से करवाया जा रहा है। इसमें अधीक्षक कार्यालय परिसर पर बने साइकिल स्टेण्ड से उतारे जा रहे टीन शेड की चद्दरों का भी इस कार्य में उपयोग लिया जा रहा है।
नहीं ली एनओसी : टीन शेड निर्माण को लेकर चिकित्सालय प्रशासन ने हमसे कोई एनओसी नहीं मांगी है। इस कार्य के लिए चिकित्सालय परिसर में अलग से पीडब्ल्यूडी की गेंगहट स्थापित है।
आर.के. मूंदड़ा, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी हॉस्पिटल गेंगहट प्रभारी
निजी संस्था की सेवा : निजी संस्था की ओर से एमएनडीवाई के बुजुर्गों के काउंटर के बाहर बैठक व्यवस्था की गई है। इसी तरह अन्य निर्माण कार्य भी अन्य सहयोग से करवाया जा रहा है। हॉस्पिटल की ओर से अलग से कोई खर्चा नहीं किया जा रहा।
डॉ. विनय जोशी, अधीक्षक, एमबी हॉस्पिटल