
उदयपुर. उदयपुर सरस डेयरी से जुड़े 42 हजार दुग्ध उत्पादक किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। लंबे समय से प्रस्तावित 75 करोड़ रुपए के कैटल फीड (पशु आहार) प्लांट का रास्ता साफ हो गया है। भटेवर के पास मावली रोड पर संयंत्र के लिए करीब 50 बीघा (9.23 हेक्टेयर) जमीन पहले ही आवंटित की जा चुकी है और अब इस भूमि तक राष्ट्रीय राजमार्ग-162ई से पहुंच मार्ग उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। यूडीए प्लांट पर जाने 100 फीट रास्ते के लिए जमीन अवाप्त करेगा।
राजस्थान सरकार ने वर्ष 2023 में ग्राम खालातौड़, पटवार मंडल भटेवर, तहसील वल्लभनगर में स्थित 9.23 हेक्टेयर भूमि राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (आरसीडीएफ) को 99 वर्ष की लीज पर पशु आहार संयंत्र के लिए आवंटित की थी। अब आरसीडीएफ ने संयंत्र तक पहुंच के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-162ई से 100 मीटर चौड़ा मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की। उपखंड अधिकारी वल्लभनगर ने रिपोर्ट दी और बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग से सबसे नजदीक स्थित आराजी नंबर 1336, 1341 और 5716/1342 उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) के नाम दर्ज हैं। ऐसे में जिला कलक्टर कार्यालय ने यूडीए को संयंत्र तक पहुंच मार्ग उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
75 करोड़ की परियोजना, आरएसआरडीसी बनाएगी
राज्य सरकार ने इसी वर्ष फरवरी के बजट में उदयपुर में कैटल फीड प्लांट की घोषणा करते हुए 75 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे। परियोजना के निर्माण के लिए राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम लिमिटेड (आरएसआरडीसी) को कार्यकारी एजेंसी बनाया गया है। आरएसआरडीसी आवंटित भूमि के बदले जिला प्रशासन को 12.40 करोड़ रुपए देगा।
संयंत्र की क्षमता 150 मीट्रिक टन प्रतिदिन होगी। भटेवर में मिली जमीन पूरी तरह समतल है। इससे भूमि समतलीकरण पर होने वाला करीब 4 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च बचेगा।
मिलेगा सस्ता पशु आहार
वर्तमान में उदयपुर जिले में पशु आहार का कोई उत्पादन संयंत्र नहीं है। सरस डेयरी को हर माह 1100 मीट्रिक टन पशु आहार पाली और जोधपुर से मंगवाना पड़ता है। केवल परिवहन पर ही हर महीने 6.38 लाख रुपए खर्च होते हैं। स्थानीय स्तर पर संयंत्र शुरू होने से परिवहन खर्च में बड़ी कमी आएगी और हर वर्ष करोड़ों रुपए की बचत होगी।
भटेवर बेल्ट के किसानों को सबसे अधिक फायदा
उदयपुर सरस डेयरी में प्रतिदिन औसतन 80 हजार लीटर दूध की आवक होती है। इसमें से लगभग 50 हजार लीटर, यानी करीब 60 प्रतिशत दूध, अकेले भटेवर, मावली, भींडर, घासा और आसपास के क्षेत्रों से आता है। सरस डेयरी से जुड़े 42 हजार किसानों में से करीब 15 हजार किसान इसी क्षेत्र के हैं, जहां सबसे अधिक गाय और भैंस पालन होता है। संयंत्र शुरू होने के बाद किसानों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण पशु आहार उपलब्ध होगा। इससे पशुपालन की लागत कम होगी, दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और पशुपालकों की आय में भी वृद्धि होने की संभावना है।