
मो.इलियास/उदयपुर.दो बेटियों के जन्म के बाद गर्भ में पल रहा तीसरा भ्रूण भी कन्या का होने पर पुत्रवधु की निर्मम हत्या करने वाली सास को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सजा सुनकर 67 वर्षीय सास गंगाबाई पत्नी सुखलाल मेनारिया अवाक रह गई।वल्लभनगर क्षेत्र के रुंडेडा निवासी गंगाबाई को पुलिस ने उसकी पुत्रवधु रीना उर्फ रेखा पत्नी विनोद मेनारिया की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था। सुनवाई के दौरान अपर लोक अभियोजक प्रेमसिंह पंवार ने 20 गवाह व 22 दस्तावेज पेश किए। आरोप सिद्ध होने पर अतिरिक्त सेशन न्यायाधीश (महिला उत्पीडन प्रकरण) के पीठासीन अधिकारी डॉ. दुष्यंत दत्त ने निर्णय में स्पष्ट लिखा कि अभियुक्ता गंगाबाई ने स्वयं एक महिला होकर संगीन अपराध किया है। उसने सम्पूर्ण मानवीय सभ्यताओं एवं समाज में स्थापित किए गए रिश्तों की मर्यादाओं को लांघते हुए अपनी गर्भवती पुत्रवधु और गर्भ में पल रहे आठ माह के भू्रण की हत्या की। न्यायालय ने सुनवाई के बाद आरोपी गंगाबाई को धारा 302 में आजीवन कारावास व 5 लाख रुपए तथा 201 में पांच वर्ष के कठोर कारावास तथा एक लाख रुपए की सजा सुनाई।
यह था मामला
मेनार निवासी रमेशचन्द्र पुत्र देवीलाल गदावत ने 20 जुलाई 2016 को एमबी हॉस्पिटल में वल्लभनगर थानाधिकारी को अपने समधन गंगाबाई व उसके परिजनों के खिलाफ पुत्री रीना की हत्या की रिपोर्ट दर्ज करवाई। बताया कि अप्रेल 2008 में पुत्री का विवाह विनोद से करवाया था। उसके दो बच्चियां कृष्णा (6) और रानू (4) है। वर्तमान में बेटी के गर्भवती होने पर ससुरालजनों ने भीण्डर में चिकित्सक से उसकी जांच करवाई थी। गर्भ में तीसरी संतान भी बेटी पलने पर आरोपी पुत्रवधु से खफा हो गई और उसे परेशान करने लगी। घटना वाली रात को परिजनों के सोने के बाद गंगाबाई ने पेटीकोट के नाडे से गला दबाकर रीना की हत्या कर दी।
चिकित्सकीय साक्ष्य बना आधार
- पोस्टमार्टम के दौरान रीना की मौत 18 से 24 घंटे पहले होने की पुष्टि हुई।
- उसका पूरा शरीर अकड़ा हुआ था। गले में फंदे के अलावा कोई और निशान नहीं था।
-फंदे को हटाने पर चमड़ी के नीचे खून जमा हुआ था।
- रीना 32 सप्ताह की गर्भावस्था में थी। गर्भाशय में उसके मृत भू्रण मिला।
- सम्पूर्ण जांच में मृत्यु का कारण गले में फंदे से दम घुटना बताया गया।