
उदयपुर. नियत समय में फ्लेट की सुपुर्दगी नहीं देने पर स्थायी लोक अदालत ने विपक्षियों को क्षतिपूर्ति राशि देने का आदेश दिया।आजाद नगर सज्जनगढ़ रोड निवासी राजेश पुत्र चन्द्रकांत धडक़े ने श्रीजी लैण्डस्क्वायर प्राइवेट लिमिटेड, शिकारवाड़ी जरिये निदेशक आशीष शर्मा, सेक्टर-13 निवासी निदेशक आशीष शर्मा, मैसर्स एसआर स्क्वायरलैण्ड प्राइवेट लिमिटेड जरिये निदेशक अभिताभ गोयल व एसआर बिल्ड होम मिडटाउन कॉम्पलेक्स उदियापोल के खिलाफ परिवाद पेश किया था। बताया कि उसने शिकारवाड़ी रेजीडेन्सी में फ्लेट नम्बर 103 का 29 सितम्बर 2014 को विक्रय इकरार कर विक्रय राशि का भुगतान कर दिया। परिवादी के पक्ष में वास्तविक कब्जा हस्तातंरण एवं विक्रय पत्र का पंजीयन नहीं करने तथा 10 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि की मनमानी शर्त रखने पर व्यथित होकर आवेदन किया। भुगतान के बाद विपक्षियों को 24 माह में फ्लेट का कब्जा सुपुर्द करना था। समय पर कब्जा सुपुर्द नहीं किया और पास में सैनिक छावनी की ओर से स्थगन होने के कारण कार्य पूर्ण नहीं कर पाना बताया। फिर हाईकोर्ट का स्टे बताया, लेकिन लिखित में कोई कारण नहीं बताया। परिवाद में बताया कि उक्त परिसर में स्वीकृत रूप से चार मंजिल तक के निर्माण में कोई स्थगन व एतराज नहीं होने के बावजूद कब्जा नहीं देकर अनफेयर ट्रेड प्रेक्टिस अपनाई गई। कब्जे का आग्रह किया तो भवन का अवलोकन किया तो उसमें काफी टूट-फूट थी, सुविधा उपलब्ध नहीं थी। मरम्मत करवाने के लिए कहा तो 10 लाख रुपए की अतिरिक्त मांग की गई तथा उसके बाद ही फ्लेट की रजिस्ट्री व कब्जा सुपुर्द के लिए कहा। विपक्षी का उक्त शर्त एक अनुचित व्यापारिक व्यवहार होना जाहिर कर, नियत अवधि में कब्जा नहीं सुपुर्द करने से तीस माह में तीन लाख का अतिरिक्त किराए का भुगतान करना पड़ा।
स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष के.बी.कट्टा, सदस्य सुशील कोठारी व ब्रजेन्द्र सेठ ने सुनवाई के बाद विपक्षियों की सेवा में दोष माना। न्यायालय ने विपक्षियों को आदेश दिया कि वे दो माह में फ्लेट में पूरा काम करवाकर परिवादी को संभलाते हुए उसका नियमानुसार पंजीयन करवाए तथा बतौर क्षतिपूर्ति परिवादी को एक लाख रुपए व आवेदन खर्च के पांच हजार रुपए अलग से दे।