
उदयपुर . किसी भी व्यक्ति से यह कल्पना नहीं की जा सकती है कि वह ऑपरेशन के लिए मात्र कीमत के आधार पर किसी प्रोडक्ट को क्रय कर अपने स्वास्थ्य से खिलवाड़ करे। ऐसे स्थिति में बीमा कंपनी को व्यक्ति के शरीर में डाले गए स्टंट की अधिक कीमत बताकर राशि काटने का हक नहीं है।
उक्त निर्णय स्थायी लोक अदालत ने न्यू अहिंसापुरा फतहपुरा निवासी आजाद जैन बनाम यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड फतहपुरा व नेशनल इंश्योरेंस कंपनी बापूबाजार के मामले में देते हुए विपक्षी की सेवा को दोषपूर्ण माना। अदालत के अध्यक्ष के.बी. कट्टा, सदस्य सुशील कोठारी व बृजेन्द्र जैन ने विपक्षी कंपनी को आदेश दिया कि वह पॉलिसी के अधीन दोनों स्टंट की काटी 1.56 लाख रुपए की राशि मय 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज से अदा करे। इसके अलावा मानसिक क्षतिपूर्ति व वाद खर्च के 15 हजार रुपए अलग से दे।
यह था मामला
परिवादी जैन ने बताया कि उसने दोनों विपक्षी कंपनियों से 5-5 लाख रुपए की मेडिकल बीमा पॉलिसी करवा रखी थी। उसके सीने में पीड़ा होने पर उसने एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में इलाज करवाते हुए स्टंट डलवाए। इस पर कुल खर्च करीब 6.33 लाख रुपए आया। विपक्षी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी बापूबाजार के समक्ष 5 लाख का क्लेम पेश किया, कंपनी ने 24,938 रुपए कम करते हुए 4.75 लाख रुपए दिए। इसके अलावा 1.33 लाख का विपक्षी एक कंपनी में क्लेम किया तो उस कंपनी ने विपक्षी दो से भुगतान करने का हवाला देकर खारिज कर दिया। परिवादी ने न्यायालय ने विपक्षी दो से बाकी 24,938 रुपए व विपक्षी-1 के यहां पेश क्लेम के 1.33 लाख का भुगतान मय ब्याज सहित देने की मांग की। विपक्षी-2 कंपनी ने जवाब दिया कि उसने मेडिक्लेम बीमा पॉलिसी की शर्तों के अनुसार ही भुगतान किया है। शेष राशि स्टंट की मूल्य अधिक एवं वास्तविक नहीं होने के कारण अदा नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने सुनवाई के बाद कहा कि यह प्रार्थी पर निर्भर करता है कि वह अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कितनी मेडिक्लेम पॉलिसी, कितनी बीमा कंपनियों से भुगतान के लिए किस कंपनी से पहले आवेदन करे।