उदयपुर

उदयपुर : थम नहीं रही वारदातें, इस बार सीनियर सिटीजन कार्ड के नाम पर कर दी 15.50 लाख की साइबर ठगी

उदयपुर में इंस्टाग्राम विज्ञापन के झांसे में आकर एक बुजुर्ग से सीनियर सिटीजन कार्ड बनाने के नाम पर 15.50 लाख रुपए की साइबर ठगी हो गई। वहीं, 22 साल पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में अदालत ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 2-2 साल की सजा सुनाई।
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Aug 04, 2026
cyber fraud
साइबर ठगी

उदयपुर.इंस्टाग्राम पर दिखे एक विज्ञापन पर क्लिक करना सेक्टर-14 निवासी एक बुजुर्ग को महंगा पड़ गया। साइबर ठगों ने सीनियर सिटीजन कार्ड बनाने का झांसा देकर मोबाइल का नियंत्रण हासिल किया और बैंक खाते से 15.50 लाख रुपए निकाल लिए। पीड़ित की रिपोर्ट पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सेक्टर-14 निवासी जयंती प्रकाश तेजावत ने रिपोर्ट में बताया कि 2 अगस्त शाम 5 बजे इंस्टाग्राम पर आए विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद उनके पास एक व्यक्ति का कॉल आया। फिर वॉट्सऐप वीडियो कॉल करके खुद को सीनियर सिटीजन कार्ड बनाने से संबंधित बताते हुए बैंक और व्यक्तिगत जानकारी मांगी गई। ठगों ने एक मोबाइल ऐप का लिंक भेजकर उसे इंस्टॉल कराया और सभी जरूरी परमिशन ले ली।

अलग-अलग ट्रांजेक्शन में निकले रुपए

कुछ देर बाद उनके बैंक खाते से दो बार 5-5 लाख, दो बार ढाई-ढाई लाख और एक बार 50 हजार रुपए सहित कुल 15.50 लाख रुपए अलग-अलग ट्रांजेक्शन में निकाल लिए गए। बैंक से मैसेज मिलने पर ठगी का पता चला। ऐसे में राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।

झांसे में नहीं आने की अपील

पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर साइबर ठगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले विज्ञापनों के झांसे में आकर किसी भी अनजान लिंक या ऐप को डाउनलोड न करें और बैंक संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

इधर, बैंक धोखाधड़ी के 22 साल पुराने मामले में फैसला, दो दोषी करार

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार जोशी की अदालत ने 22 साल पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में फैसला सुनाते हुए दो दोषियों को 2-2 वर्ष के साधारण कारावास व अर्थदंड की सजा सुनाई। मामला वर्ष 2004 में थाना सूरजपोल में दर्ज केस से जुड़ा है।

मामले के अनुसार अमल का कांटा सूरजपोल निवासी आरिफ हुसैन और आदर्श नगर हिरणमगरी सेक्टर 4 निवासी प्रेमसुख ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर 10 सितंबर 2002 को स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर की उदियापोल शाखा से कंप्यूटर लैब स्थापित करने के नाम पर 35 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत कराया था। आरिफ ने फर्म मैसर्स नीट सिस्टम के जरिये मैसर्स विंट्रॉन इंडस्ट्रीज नई दिल्ली का फर्जी कोटेशन बैंक में प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर 11 लाख 44 हजार 71 रुपए का बैंकर्स चेक जारी किया। बाद में जांच में यह कोटेशन कूटरचित पाया गया, क्योंकि विंट्रॉन कंपनी ने ऐसा कोई कोटेशन जारी करने से इनकार किया। अभियोजन अधिकारी दिव्यराजसिंह झाला की दलीलों व साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने दोनों को दोषी करार दिया।

Updated on:
04 Aug 2026 06:00 pm
Published on:
04 Aug 2026 06:00 pm