
उदयपुर. दीपावली पर घर-आंगन को रोशन करने के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन देने की पहल की जा रही है। इस बार देशी गो माता के पंचगव्य से निर्मित उत्पादों को दीपोत्सव से जोड़ने का संकल्प लिया गया है। इसके तहत गाय के गोबर से बने दीपकों के उपयोग के साथ गो आधारित धूपबत्ती, हवन सामग्री, साबुन, शैम्पू और अन्य उत्पादों को अपनाने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उदयपुर में भी इस अभियान के तहत एक लाख गोमय दीपक समाज तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
राजस्थान क्षेत्र गो सेवा संयोजक एवं ग्रामीण बैंक के सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रबंधक राजेन्द्र पामेचा ने बताया कि मेरी गाय मेरा जीवन, मेरा गोवंश मेरा जीवन के भाव के साथ गोवंश के संरक्षण, संवर्धन और गो आधारित उत्पादों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। स्वदेशी मेले में गो उत्पादों की स्टॉल के माध्यम से 25 हजार दीपकों की बिक्री हुई। उदयपुर में पहले से निर्मित 10 हजार दीपकों का उपयोग किया गया है। शेष दीपक देवनारायण गोशाला कोटड़ी, राजलदेसर गोशाला चूरू सहित अन्य गोशालाओं से मंगवाए गए हैं।
गोपाल कनेरिया पिछले चार वर्षों से गोबर के दीपक बनाने और इनके उपयोग को प्रोत्साहित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नागपुर की संस्था स्वानंदगोविज्ञान से मशीन, सांचे और कच्चा माल मंगवाकर घर पर ही दीपक बनाने शुरू किए थे। स्थानीय स्तर पर अब तक एक हजार दीपकों की बिक्री हुई है। अन्य राज्यों में इनकी मांग अच्छी है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी इसी तरह के दीपक पांच से सात रुपए में उपलब्ध हैं, जबकि वे तीन रुपए प्रति दीपक की दर से उपलब्ध करा रहे हैं।
एक लाख के गो उत्पादों की बिक्री
पामेचा के अनुसार स्वदेशी मेले में करीब एक लाख रुपए के गो उत्पादों की बिक्री हुई। इनमें गोमूत्र अर्क, संजीवनी रस, नीम-चंदन साबुन, धूपबत्ती, अगरबत्ती, हवन कंडे, गोघृत, बाम, तेल, मंजन और जैविक खाद शामिल हैं। उदयपुर में गो आधारित उत्पादों के निर्माण के तीन केंद्र विकसित हुए हैं। वसुधा-3, न्यू आनंद नगर सहित विभिन्न स्थानों पर इनका निर्माण हो रहा है। ढीकली में नरेश नागदा जैविक खाद और गो उत्पादों का उत्पादन कर रहे हैं। वे अब तक करीब एक हजार किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दे चुके हैं।
एक करोड़ श्री सुरभि मंत्र जाप
अभियान के तहत गोपाष्टमी पर गोशालाओं और घरों में गो माता पूजन, संभाग में एक करोड़ श्री सुरभि मंत्र जाप तथा विद्यार्थियों में जागरूकता के लिए गो विज्ञान परीक्षा भी आयोजित की गई। इसमें उदयपुर विभाग से 18 हजार और पूरे राजस्थान से करीब 3 लाख 21 हजार विद्यार्थी शामिल हुए।