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उदयपुर : चार सौ साल पुराना महालक्ष्मी मंदिर, दीपावली पर पांच दिन तक होंगे उत्सव

भटियानी चौहट्टा स्थित करीब 400 वर्ष पुराने महालक्ष्मी मंदिर में दीपावली पर पांच दिवसीय उत्सव होगा। धनतेरस से खेखरे तक श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी। दीपावली पर माता को 3.5 लाख रुपए की लागत का सोने के काम वाला केसरिया वेश धारण कराया जाएगा। दिन में तीन बार शृंगार बदलेगा। 9 नवंबर को अन्नकूट नहीं होगा, जबकि 10 नवंबर को शाम 5 बजे से अन्नकूट दर्शन होंगे।
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उदयपुर

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Mukesh Gaur

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Updated: 5 Nov 2026, 9:17 PM IST

mahalaxmi mandir udaipur

mahalaxmi mandir udaipur

उदयपुर. दीपावली पर महालक्ष्मीजी की विशेष आराधना की जाती है। शहर के भटियानी चौहट्टा स्थित महालक्ष्मी मंदिर में दीपोत्सव पर विशेष दर्शन होते है। दीपोत्सव पर यहां पांच दिन उत्सव रहता है। धनतेरस से खेखरे तक मंदिर में दर्शनार्थियों की भीड़ रहती है। मेवाड़ सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कम ही लोग जानते हैं कि यह मंदिर राजस्थान के प्राचीन महालक्ष्मी मंदिरों में शुमार है। मंदिर से जुड़े जानकारों के अनुसार, प्रदेश में इससे पुराना महालक्ष्मी मंदिर मारवाड़ के भीनमाल में स्थित है।

महालक्ष्मी मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी जतिन श्रीमाली ने बताया कि भटियानी चौहट्टा स्थित मंदिर का निर्माण जगदीश मंदिर के निर्माण काल के समकक्ष हुआ था। मंदिर के सामने स्थित गणपति मंदिर का निर्माण भी इसी समय किया गया था। उन्होंने बताया कि श्रीमाली समाज महालक्ष्मी समाज की कुलदेवी हैं। वहीं, ट्रस्ट अध्यक्ष भगवतीलाल श्रीमाली के अनुसार मंदिर का निर्माण महाराणा राजसिंह द्वितीय के शासनकाल में करीब 400 वर्ष पूर्व हुआ था। उस समय जगदीश मंदिर का निर्माण कार्य भी चल रहा था।

संभाग में कई अन्य मंदिर, लेकिन बाद में हुए निर्माण

उदयपुर संभाग में महालक्ष्मीजी के कई अन्य मंदिर भी हैं, लेकिन इनका निर्माण पिछले 100 से 150 वर्षों के दौरान हुआ है। इनमें चित्तौड़गढ़ दुर्ग में नीलकंठ महादेव मंदिर के समीप स्थित मंदिर, सलोदा, खमनोर के पास मजा गांव, देलवाड़ा के पास दाड़मी गांव, चित्तौड़गढ़ के बिलिया गांव और बांसवाड़ा के छींच क्षेत्र स्थित महालक्ष्मी मंदिर प्रमुख हैं।

दिन में तीन बार बदलेगा माता का शृंगार

श्रीमाली जाति संपत्ति व्यवस्था ट्रस्ट महालक्ष्मी मंदिर के कार्यकारी अध्यक्ष जयप्रकाश श्रीमाली ने बताया कि दीपोत्सव के तहत शुक्रवार को धनतेरस पर सुबह 4.30 बजे मंदिर के पट खुलेंगे, जो रात 12 बजे तक खुले रहेंगे। इस दौरान सुबह, दोपहर और शाम को माता का विशेष शृंगार बदला जाएगा। यही क्रम रूप चतुर्दशी पर भी रहेगा। 8 नवंबर दीपावली के दिन सुबह 4.30 बजे मंदिर के पट खुलेंगे। इस अवसर पर माता को करीब 3.5 लाख रुपए की लागत का सोने के काम वाला केसरिया वेश धराया जाएगा। इसमें सोने और चांदी का वर्क किया गया है। रात 12.30 से 1.30 बजे तक माता का शयन होगा। इसके बाद अगले दिन भी दिनभर श्रद्धालुओं के लिए दर्शन खुले रहेंगे।

पंचांग के अनुसार 9 नवंबर को खेखरा नहीं होगा इस दिन मंदिर में अन्नकूट के दर्शन नही होगें। वहीं, 10 नवंबर को अन्नकूट दर्शन का आयोजन होगा। शाम 5 बजे से शुरू होने वाले अन्नकूट के दर्शन देर रात तक जारी रहेंगे।

समुद्र मंथन से प्रकट हुई थी माता की प्रतिमा

भट्टियानी चौहटा में एक मात्र महालक्ष्मी मंदिर है। दीपोत्सव पर यहां विशेष दर्शन होते है। दीपोत्सव पर यहां चार दिन उत्सव रहता है। धनतेरस से खेखरे तक यहां मंदिर पर दर्शनार्थियों की भीड़ रहती है। महालक्ष्मी का प्राकृटोत्सव श्राद पक्ष की अष्टमी को होता है।

मान्यता है कि महालक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट हुई हैं। श्रीमाली जाती सम्पति व्यवस्था ट्रस्ट ने बताया कि महालक्ष्मी मंदिर तत्कालीन महाराणा जगत सिंह के वक्त बना था। यह मंदिर करीब 400 वर्ष पुराना है। इस मंदिर का निर्माण जगदीश मंदिर के निर्माण के वक्त जो पत्थर व सामग्री बच गई थी उससे हुआ था, वही इस मंदिर के निर्माण के बाद जो सामग्री बची उससे मंदिर के सामने गणेश मंदिर का निर्माण करवाया था। महालक्ष्मी की प्रतिमा भीनमाल से लाए थे। यह प्रतिमा सफेद पत्थर के हाथी पर बैठी हुई है। महालक्ष्मी श्रीमाली समाज की कुलदेवी है। दीपोत्सव पर जगदीश चौक से रंग निवास तक भट्टियानी चौहटा दीपोत्सव समिति की ओर से विद्युत सजा की जाती है।