
उदयपुर. झोलाछाप और अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों के खिलाफ चिकित्सा विभाग ने सख्ती दिखाई है। 181 पर मिली शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने ऋषभदेव ब्लॉक के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में औचक कार्रवाई करते हुए छह क्लीनिकों की जांच की। जांच के दौरान क्लीनिकों में आवश्यक दस्तावेजों की कमी, बिना लाइसेंस दवाइयां रखने और बायोमेडिकल कचरे के असुरक्षित निस्तारण जैसी अनियमितताएं सामने आईं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक आदित्य के निर्देश पर गठित टीम ने पुलिस के सहयोग से यह कार्रवाई की। टीम में जिला क्षय अधिकारी डॉ. प्रणव भावसार, खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल भगोरा, डॉ. रितेश असोड़ा, डॉ. मनोज कुमार मीणा, हेड कांस्टेबल नारायण मीणा और कांस्टेबल महेंद्र सिंह शक्तावत शामिल रहे।
बिना प्रमाण-पत्र संचालित हो रहे थे क्लीनिक
विभागीय जांच में सामने आया कि कार्रवाई के दायरे में आए क्लीनिक बिना वैध क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट प्रमाण-पत्र के संचालित हो रहे थे। इनमें आधुनिक एलोपैथिक पद्धति से उपचार के लिए आवश्यक कानूनी और चिकित्सकीय दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं पाए गए। टीम ने मौके पर मौजूद व्यवस्थाओं की जांच कर अनियमितताओं को चिह्नित किया।
एक नहीं, कई गड़बड़झाले
जांच के दौरान क्लीनिकों से बिना लाइसेंस रखी गई दवाइयां, एंटीबायोटिक्स और इंजेक्शन मिलने की जानकारी सामने आई। विभाग के अनुसार, इनका इस्तेमाल मरीजों के उपचार में किया जा रहा था। इसके अलावा बायोमेडिकल कचरे का निस्तारण भी निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया। मेडिकल कचरा खुले में असुरक्षित तरीके से रखा हुआ था, जिससे संक्रमण फैलने और जनस्वास्थ्य प्रभावित होने का खतरा हो सकता है।
छह क्लीनिक कार्रवाई के दायरे में
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सरस्वती क्लीनिक, योगित क्लीनिक, सत्यम क्लीनिक और जनता ऑर्थो क्लीनिक सहित दो अन्य बिना नाम से संचालित क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई की।