
उदयपुर.परसाद .जनजाति बाहुल क्षेत्र में शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए सरकारी दावों में योजनाओं और फंड की कोई कमी नहीं बताई जा रही, लेकिन धरातलीय वास्तविकता कुछ और ही नजर आ रही है। ग्रामीण क्षेत्र में कई स्कूल एसे हैं, जहां कमरे ही नहीं है और जहां है, वहां कमरे जर्जर हो चुके है, छतों से पानी का रिसाव हो रहा है, या प्लस्तर गिर रहा है । ऐसा ही मामला उपखंड के नालहल्कार पंचायत के खेरकी गांव स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय का है, जहां कमरों की कमी के चलते तीन कक्षाओं के बच्चे बरामदे में बैठकर पढाई करने को को मजबूर है ।
बच्चे का नामांकन और बैठक व्यवस्था
विद्यालय में वर्तमान में 237 बच्चों का नामांकन है, जिनमें पहली से पांचवीं तक 57 बालक और 50 बालिकाएं है, वहीं छठी से आठवी तक 63 बालक और 67 बालिकाएं पढाई करते हैं। वहीं स्टाफ की भी कमी नहीं है। वर्तमान में प्रधानाध्यापक और शारिरीक शिक्षिका सहित 16 शिक्षक है ।
ऐसी है बैठक व्यवस्था
नब्बे के दशक में स्वीकृत इस खैरकी स्कूल में बच्चों के बैठने केलिए पांच कमरे और एक छोटा सा ऑफिस है । इनमें से एक कमरे में पुस्तकों, मिड डे मील की सामग्री और सूखी लकड़ियों के लिए भंडार के रूप में उपयोग किया जा रहा है । तीन कमरे में अलग-अलग कक्षाएं संचालित है । पहले कमरे में सातवीं कक्षा, दूसरे में पांचवीं व एक में पहली व दूसरी कक्षा के बच्चों को शामिल बैठाया जा रहा है ।वहीं छठी,सातवीं और चौथी कक्षा की पढाई कमरों के अभाव में बरामदे में करवाई जा रही है । सामने बने एक कमरे में आधे में ऑफिस है और आधे में आठवीं कक्षा बैठती है, लेकिन बारिश में कमरे की छत से पानी रिसाव के चलते बरामदे में ही बैठाना पडता है ।
बारिश में बच्चों को होती है परेशानी--
बारिश के दिनों में खैरकी के दूर-दराज फलों से पैदल आने वाले बच्चों को रास्ते में आने वाली समस्याओं से जूझना पडता है परन्तु स्कूल पहूंचने के बाद भी परेशानी कम नहीं होती । बारिश में हवा के दौरान बरामदे में पानी आ जाने से कई बार भीग जाते हैं, वहीं छतों के रिसाव से खुद को व पुस्तकों को बचाने की समस्या खडी हो जाती है । बारिश से बचाने के लिए शिक्षको बच्चों को तीन कमरों में हीं बैठाने को मजबूर होना पडता है ।
कमरों के लिए भूमि भी हो चुकी है आवंटित
2018 मे इस स्कूल के 3 कमरों के निर्माण के लिए 21 लाख की स्वीकृति तत्कालीन विधायक ने दिलाई थी। परंतु स्कूल के नाम पर जमीन का पट्टा नहीं होने से पैसा लेप्स हो गया। अब खैरकी स्कूल में नये कमरों के निर्माण के लिए खातेदारों ने अपनी भूमि बच्चों की पढाई के लिए दान में दे दी है जिससे बच्चे पढ सकें । स्कूल के लिए 0.29 हेक्टेयर भूमि का राजस्व विभाग द्वारा आवंटन कर दिया गया है । ग्रामीणों को अपने बच्चों बैठने के लिए नये कमरों के निर्माण की आस लगाये हुए है ।
खेल मैदान भी बच्चों को नसीब नही-
स्कूल में खेल मैदान के लिए जगह नही होने से बच्चों को सही से अभ्यास करने नही मिलता । क्षेत्र में खेल में बहुत सी प्रतिभाएं है जिन्हें उचित मार्गदर्शन और प्रेक्टिस मिल जाए तो वे अच्छे खिलाडी बन सकते हैं । खेल मैदान के अभाव में स्कूल के छोटे से परिसर में ही शिक्षक बच्चों की प्रतिभाओं को तराशने का प्रयास कर रहे है ।
कमरों की मांग कई बार उठाई
विद्यालय प्रशासन, सरपंच व स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कई बार कमरों के लिए विभाग और जनप्रतिनिधियों से मांग की थी। सराडा में कलक्टर की जनसुनवाई में लिखित में मांग रखी गई। इसके साथ ही साधारण सभा में भी कमरों की मांग लेकर मांग की जा चुकी है ।लेकिन कमरों को लेकर अब कोई संतोषजनक उत्तर नही मिला ।
जर्जर व बदहाल रसोईघर --
स्कूल का रसोई घर किसी खतरे से कम नही है ,रसोईघर पूरी तरह से जर्जर हो चुका है, जिसकी दीवारों से प्लस्तर गिर रहा है। दीवारों में चूहों ने बिल बना दिए है, जिनमें से कई बार जहरीले जानवर सांप व बिच्छू निकल चुके हैं । जर्जर दीवारों से उखडते प्लास्टर की रेती व सीमेंट कई बार बच्चों के खाने में गिर जाती हैं । रसोई बनाने वाली कार्मिकों ने बताया कि दीवारों की दरारों में सांप निकल आते है, जिससे खुद की जान व खाने में गिर जाने की आशंका से बच्चों को लेकर हर दिन खौफ में निकलना पडता है ।बारिश के दिनों में छत से पानी टपकनेे से खाना बनाने मुश्किल हो जाता है ।
इनकना कहना है
विद्यालय में बच्चों को बैठने में परेशानी हो रही है। कमरे कम होने से बरामदे में बैठाना पड रहा है । स्कूल की समस्या को लेकर उच्चाधिकारियों को भी कई बार अवगत करवा चुके है । यदि कुछ नये कमरों बन जाए तो बच्चों को बारिश के दिनों में होने वाली परेशानी नही होगी ।
तिलकेश मीणा,प्रधानाध्यापक , राउप्रावि खेरकी
विद्यालय में कक्षा-कक्ष के लिए जिला प्रशासन उदयपुर, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सराडा को कई बार पत्र लिखा, साथ ही साधरण सभा की बैठक में भी मुद्दा उठाया। इसके अलावा पंचायत स्तरीय, उपखंड व जिला स्तरीय जनसुवाई मे भी लिखित में अवगत करवाया है। परंतु किसी ने भी ध्यान नहीं दिया है। स्कूल क्रमोन्न होने के बाद एक भी नये कमरे का निर्माण नहीं हुआ है।
वर्षा मीणा,सरपंच नाल, हल्कार
स्कूल के नाम पर भूमि नहीं होने से कमरे नही बन सके, अब जमीन आवंटित हो गई है जिससे समसा के तहत नये कमरे बनाए जाएंगे ।
नाथूलाल बुनकर, सीबीईओ, सराडा