
उदयपुर. सरकारी स्कूलों में बच्चों को दोपहर का भोजन और सुबह दूध देने की व्यवस्था चल रही है, लेकिन इसके लिए खर्च होने वाली राशि समय पर नहीं मिलने से स्कूलों की रसोई चलाना मुश्किल हो गया है। मिड-डे मील की कन्वर्जन राशि और कुक कम हेल्पर का मानदेय मार्च 2026 से बकाया है, वहीं बाल गोपाल दुग्ध योजना में दूध गर्म करने के मानदेय, चीनी और गैस का भुगतान अगस्त 2025 से अटका हुआ है। अक्टूबर आधा बीतने को है, लेकिन राशि नहीं मिलने से पोषाहार प्रभारियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उदयपुर जिले में राजकीय विद्यालयों, संस्कृत स्कूलों और मदरसों सहित कुल 2977 विद्यालय संचालित हैं। इनमें कक्षा एक से आठ तक के करीब 2.64 लाख विद्यार्थियों के लिए मिड-डे मील और बाल गोपाल दुग्ध योजना संचालित होती है। शिक्षकों के अनुसार, भोजन बनाने और दूध उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभाने के लिए जरूरी राशि नहीं मिलने से व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
पोर्टल बदला, भुगतान की रफ्तार नहीं बढ़ी
पहले भुगतान पीडी और एसएनए पोर्टल के माध्यम से किए जाते थे। अब व्यवस्था एसएनए स्पर्श पोर्टल पर स्थानांतरित की गई है। इसके तहत बैंक खातों का डेटा दर्ज करने और अपडेट करने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन काम धीमा होने से भुगतान अटकने की बात सामने आ रही है। मिड-डे मील की कन्वर्जन राशि से भोजन तैयार करने का खर्च पूरा किया जाता है। प्राथमिक कक्षाओं के लिए प्रति विद्यार्थी प्रतिदिन 6.78 रुपए और कक्षा छह से आठ तक 10.17 रुपए निर्धारित हैं। वहीं, कुक कम हेल्पर को 2467 रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलता है। बाल गोपाल योजना में दूध गर्म करने के लिए 500 रुपए प्रतिमाह अतिरिक्त मानदेय निर्धारित है। इसके अलावा चीनी और गैस का खर्च भी बकाया है।
अक्षय पात्र के 283 स्कूलों की राशि भी अटकी
उदयपुर शहर, बड़गांव और गिर्वा ब्लॉक सहित जिले के करीब 283 विद्यालयों में अक्षय पात्र फाउंडेशन के माध्यम से प्रतिदिन 18 से 20 हजार बच्चों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इन विद्यालयों की कुकिंग कन्वर्जन राशि भी जुलाई 2026 से बकाया बताई जा रही है। शिक्षक संगठनों के अनुसार, प्रदेश में करीब सवा लाख विद्यालयों के 65 लाख विद्यार्थियों के मिड-डे मील की कन्वर्जन राशि और कुक कम हेल्पर के मानदेय का भुगतान भी लंबे समय से लंबित है। दूध गर्म करने के मानदेय, चीनी और गैस की राशि करीब 14 महीने से बकाया बताई जा रही है।
मेन्यू के अनुसार भोजन देना भी चुनौती
स्कूलों में सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को रोटी, दाल-सब्जी, मंगलवार को चावल, दाल-सब्जी और गुरुवार को खिचड़ी दी जाती है। सप्ताह में एक दिन फल देना भी अनिवार्य है। प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए प्रतिदिन 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन तथा उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिए 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन वाला भोजन निर्धारित है। बाल गोपाल योजना में कक्षा एक से पांच तक 150 मिलीलीटर और कक्षा छह से आठ तक 200 मिलीलीटर दूध दिया जाता है। ऐसे में राशि अटकने से निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन और दूध की व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बन रहा है।
मिड-डे मील और बाल गोपाल दुग्ध योजना से जुड़ी बकाया राशि का विभाग जल्द भुगतान करे। स्कूलों में योजना का संचालन सुचारू रहे, इसके लिए अग्रिम राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए। उकुक कम हेल्पर के मानदेय और भोजन पकाने के लिए मिलने वाली कन्वर्जन राशि में भी बढ़ोतरी की जानी चाहिए।
शेर सिंह चौहान, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ