
उदयपुर. इस बार के चुनाव ने कई अनुमान बदल दिए। पिछले चुनाव की तुलना में बढ़े मतदान प्रतिशत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं। मतदान ज्यादा होने की वजह बगावत खत्म होने और जमीनी तैयारी मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक बढ़े हुए मतदान से ऐसे संकेत मिले हैं कि भाजपा सीधे तौर पर 43 सीटों पर मजबूत है, जो बोर्ड बनाने के लिए जरूरी सीटों से भी अधिक है। कांग्रेस की बढ़त 11 सीटों पर ही है, जबकि 24 सीटों पर कड़ा मुकाबला है। निर्दलीय व अन्य के खाते में कम से कम 1-1 सीट जा सकती है।
भाजपा में बगावत मानी जा रही थी। लेकिन, मतदान प्रतिशत बढ़ा है, जो बगावत नहीं होने के संकेत हैं। अमूमन देखा गया कि भाजपा में बगावत होती है, वहां मतदाता अन्य को वोट दे देगा, लेकिन कांग्रेस को नहीं। वजह ये कि भाजपा विचारधारा के मतदाता कट्टर मानसिकता के होते हैं।
परिसीमन भी नहीं रोक पाया
शहर विस्तार में परिसीमन अच्छा नहीं माना गया, फिर भी मतदान प्रतिशत बढ़ा है। नए वार्ड जुड़े हैं, जिसके दायरे अव्यावहारिक हो गए, फिर भी मतदान ज्यादा हुआ है। इससे संकेत हैं कि पार्टी आधार पर पहले से ही तैयारियां थीं। चुनाव आयोग के बजाय कार्यकर्ताओं ने ही घर-घर पर्चियां पहुंचाई थीं।
दोनों पार्टियों की स्थिति बताईं
भाजपा
भाजपा की तीन खासियत हैं- जाति, धर्म और संगठन... जो पार्टी आधार को मजबूत करती है। यानी मतदान प्रतिशत बढ़ना पार्टी आधार पर हुआ है। पार्टी के प्रयासों से बढ़ा है और इसमें भाजपा आगे है। लिहाजा 7वीं बार बोर्ड बनाने की ओर जाती दिख रही है।
कांग्रेस
जाति, धर्म, संगठन के मामले में कांग्रेस पीछे है। कांग्रेस ने इस बार नए चेहरों को प्रत्याशी बनाकर जोखिम उठाया है। लेकिन, यह एक संदेश है कि चाहे निगम चुनाव नहीं जीते, लेकिन आने वाले समय के लिए मजबूत टीम मिलेगी। एक तरह से सेकंड लाइन खड़ी हो रही है।
इस आधार पर विश्लेषण
प्रत्याशी, क्षेत्रीय प्रभाव, पार्टी आधारित चेहरा, नया प्रत्याशी वर्चस्व वाला है या नहीं, जाति समीकरण और बड़ी पहचान वाले प्रत्याशी आदि के आधार पर आकलन किया गया है।
दावा ये भीः समझें सीटों का गणित
- सामान्य ओपन के 32 वार्ड में 20 पर भाजपा, 1 पर कांग्रेस की बढ़त और 11 पर कड़ा मुकाबला
- सामान्य महिला की 16 में से 8 पर भाजपा, 4 पर कांग्रेस, 1 पर निर्दलीय को बढ़त और 3 पर टक्कर
- ओबीसी ओपन के 11 वार्डों में से 6 पर भाजपा, 2 पर कांग्रेस को बढ़त और 3 पर कड़ा मुकाबला
- ओबीसी महिला के 5 वार्डों में से 2 पर भाजपा, 2 पर कांग्रेस को बढ़त और 1 पर कड़ा मुकाबला
- एसटी ओपन के 5 वार्डों में से 3 पर भाजपा, 1 पर कांग्रेस को बढ़त और 1 पर कड़ा मुकाबला
- एसटी महिला के 3 वार्डों में से 1 पर भाजपा, 1 पर कांग्रेस को बढ़त और 1 पर कड़ा मुकाबला
- एससी ओपन के 5 वार्डों में से 2 पर भाजपा, 1 पर अन्य को बढ़त और 2 पर कड़ा मुकाबला
- एससी महिला के 3 वार्डों में से 1 पर भाजपा को बढ़त, जबकि 2 पर कड़ा मुकाबला बना हुआ
टॉपिक एक्सपर्ट...
स्थानीय निकाय चुनाव में मतदान प्रत्याशी के आधार पर नहीं, पार्टी के आधार पर होता है, जहां मुद्दे गौण हो जाते हैं और विचारधारा हावी हो जाती है। अंतिम समय में लोग भाजपा, कांग्रेस या अन्य पार्टी की विचारधारा में बंट जाते हैं। बढ़े मतदान का सीधे तौर पर भाजपा का प्रभाव बढ़ने का संकेत है।
लालकुमार चुघ, राजनीतिक विश्लेषक